Bihar News : मानसिक स्वास्थ्य के लिए 'संजीवनी' बनी टेलीमानस सेवा, 14416 पर एक कॉल से दूर हो रहा तनाव और अवसाद
Bihar News : बिहार में टेलीमानस सेवा मानसिक स्वास्थ्य के लिए संजीवनी साबित हो रही है. 14416 पर एक कॉल से तनाव और अवसाद दूर हो रहा है.......पढ़िए आगे
PATNA : आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते मानसिक तनाव, अवसाद और चिंता से जूझ रहे लोगों के लिए बिहार सरकार की 'टेलीमानस' (Tele-MANAS) सेवा एक बड़ा सहारा बनकर उभरी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर 14416 पर अब लोग 24 घंटे घर बैठे विशेषज्ञों से निःशुल्क परामर्श ले रहे हैं। यह सेवा न केवल मरीजों को नकारात्मक विचारों से बाहर निकाल रही है, बल्कि उनके जीवन में नई उम्मीदें भी जगा रही है।
24 घंटे उपलब्ध हैं विशेषज्ञ डॉक्टर और काउंसलर्स
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, टेलीमानस सेवा के तहत विशेष रूप से प्रशिक्षित डॉक्टर और काउंसलर्स की टीम तैनात की गई है। नींद की कमी, परीक्षा का दबाव, नशे की लत, और आत्महत्या जैसे गंभीर नकारात्मक विचारों से निपटने के लिए यह टीम रोगियों की ऑनलाइन मदद करती है। फोन पर ही दवाओं के सुझाव के साथ-साथ मरीजों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए निरंतर काउंसलिंग की सुविधा दी जा रही है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव आए, जैसे कि एकाग्रता में कमी, बिना कारण डर या क्रोध, पुरानी उदासी, या ऐसी आवाजों का सुनाई देना जो वास्तव में नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत मदद लेनी चाहिए। इसके अलावा, दैनिक कार्यों को निपटाने में कठिनाई और बिना डॉक्टरी सलाह के दवाओं का अत्यधिक सेवन भी मानसिक अस्वस्थता के लक्षण हैं। ऐसे मामलों में हेल्पलाइन नंबर पर किया गया एक कॉल 'रामबाण' साबित हो सकता है।
जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती की सुविधा
टेलीमानस केवल परामर्श तक ही सीमित नहीं है। विभागीय समीक्षा में बताया गया है कि काउंसलिंग के दौरान यदि कोई मरीज अत्यंत गंभीर पाया जाता है, तो उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराने की व्यवस्था भी विभाग द्वारा की जाती है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि मरीज को समय रहते उचित चिकित्सीय उपचार मिल सके।
घर बैठे मिल रहा निःशुल्क इलाज
यह डिजिटल स्वास्थ्य सेवा आम जनता के लिए विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है, जहाँ मानसिक रोग विशेषज्ञों की कमी है। पूरी तरह से निःशुल्क और गोपनीय होने के कारण लोग अब खुलकर अपनी समस्याओं को साझा कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर व्याप्त झिझक भी कम हो रही है।