सुपौल में आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-37 का उद्घाटन, पोषण और बाल विकास पर जोर

सुपौल में आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-37 का उद्घाटन, पोषण और बाल
सुपौल में आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-37 का उद्घाटन- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जिले में बाल विकास परियोजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों के बेहतर संचालन और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देने की दिशा में बड़ी पहल की गई है। सोमवार को उप विकास आयुक्त इन्द्रवीर कुमार, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस) और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी मंजूला व्यास द्वारा संयुक्त रूप से आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-37 का विधिवत उद्घाटन किया गया। उद्घाटन के उपरांत अधिकारियों ने केंद्र का निरीक्षण कर उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया।


स्वास्थ्य, स्वच्छता और प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने केंद्र में बच्चों की देखभाल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया। इसके साथ ही केंद्र के माध्यम से पंजीकृत बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और अन्य पात्र लाभार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी सेवाओं की प्रगति रिपोर्ट भी ली गई।


शारीरिक और मानसिक विकास की मजबूत आधारशिला हैं केंद्र

निरीक्षण के दौरान पदाधिकारियों ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल कुपोषण दूर करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास की मजबूत नींव रखते हैं। उन्होंने केंद्र के नियमित और सुचारू संचालन का निर्देश देते हुए सेविका और सहायिका को स्वच्छता बनाए रखने व गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने को कहा।


जनप्रतिनिधियों और कर्मियों से सक्रिय सहभागिता की अपील

उद्घाटन समारोह में जिला समन्वयक, महिला पर्यवेक्षिका, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कर्मियों को सरकारी मानकों के अनुरूप सेवाएं देने के निर्देश दिए। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे केंद्र के संचालन में सहयोग करें, ताकि सरकार की पोषण और बाल विकास योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद तक समय पर पहुंच सके।


स्थानीय निवासियों और लाभार्थियों में खुशी का माहौल

आंगनबाड़ी केंद्र का विधिवत संचालन शुरू होने से स्थानीय ग्रामीणों और लाभार्थियों में भारी उत्साह देखने को मिला। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि इस केंद्र के शुरू होने से गांव के बच्चों और माताओं को स्वास्थ्य जांच, पोषाहार और प्रारंभिक शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं अब अपने ही क्षेत्र में आसानी से प्राप्त हो सकेंगी।


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट