Bihar News: बेटे की हत्या के आरोप की सबूतों ने खोली सच्चाई, अदालत ने सुनाया ये बड़ा फैसला

Bihar News: कानून को अक्सर अंधा कहा जाता है, लेकिन उसकी असली ताकत इसी में है कि वह चेहरे, रिश्ते या हालात देखकर नहीं, बल्कि साक्ष्यों और कानून के मुताबिक फैसला करता है।...

Bihar News: बेटे की हत्या के आरोप की सबूतों ने खोली सच्चाई,
बेटे की हत्या के आरोप की सबूतों ने खोली सच्चाई- फोटो : reporter

Bihar News: कानून को अक्सर अंधा कहा जाता है, लेकिन उसकी असली ताकत इसी में है कि वह चेहरे, रिश्ते या हालात देखकर नहीं, बल्कि साक्ष्यों और कानून के मुताबिक फैसला करता है। छपरा व्यवहार न्यायालय से आया एक फैसला इसी बुनियादी सिद्धांत की मिसाल बन गया है। अपने ही दो वर्षीय पुत्र की हत्या के संगीन इल्जाम में पांच साल से ज्यादा वक्त तक सलाखों के पीछे रही महिला बबली खातून को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया।प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत कुमार सिंह की अदालत ने डोरीगंज थाना कांड संख्या-55/21 और सत्र वाद संख्या-369/21 की सुनवाई के बाद बबली खातून को उसके दो वर्षीय पुत्र की हत्या के आरोप से निर्दोष मानते हुए रिहाई का आदेश दिया। बबली 3 मार्च 2021 से मंडल कारा, छपरा में न्यायिक हिरासत में थी।करीब पांच साल से ज्यादा समय तक जेल में रहने के बाद अदालत के इस फैसले ने उस आरोप से उसे मुक्ति दिला दी, जिसने उसकी जिंदगी को लंबे अरसे तक सलाखों के पीछे कैद रखा था।

सात गवाह, लेकिन आरोप साबित नहीं

बबली खातून की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसके मुकदमे की पैरवी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तहत लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम यानी LADCS को सौंपी गई थी। बचाव पक्ष की ओर से मुख्य डिफेंस काउंसिल पूर्णेन्दु रंजन ने अदालत में उपलब्ध तथ्यों, साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं को मजबूती से रखा।मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल सात गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और केस रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों की गहन पड़ताल की। सुनवाई के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुंची कि अभियुक्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके।इसके बाद अदालत ने बबली खातून को हत्या के आरोप से बाइज्जत बरी कर दिया।

सिर्फ रिहाई नहीं, न्याय का बड़ा संदेश

यह फैसला महज एक महिला को जेल से बाहर निकालने का आदेश नहीं है, बल्कि आपराधिक न्याय व्यवस्था में सबूत की अहमियत को भी रेखांकित करता है। किसी व्यक्ति पर कितना भी संगीन इल्जाम क्यों न हो, महज आरोप लग जाने से उसे कानून की नजर में मुजरिम नहीं माना जा सकता।आपराधिक मुकदमे में अभियोजन पर आरोप को साबित करने की जिम्मेदारी होती है। जब अदालत के सामने पेश किए गए साक्ष्य आरोप को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहते हैं, तो आरोपी को कानून के मुताबिक बरी किया जाना न्यायिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

गरीब महिला को मिला कानूनी सहारा

बबली खातून के मामले में LADCS के जरिए मिली कानूनी सहायता भी महत्वपूर्ण रही। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उसे अदालत में प्रभावी कानूनी पैरवी का अवसर मिला। इस मामले ने यह भी दिखाया कि विधिक सहायता व्यवस्था उन लोगों के लिए कितना अहम सहारा बन सकती है, जो निजी तौर पर महंगे कानूनी खर्च का वहन करने की स्थिति में नहीं होते।आखिरकार अदालत के फैसले ने यह संदेश फिर दोहराया कि इल्जाम और जुर्म साबित होना दो अलग बातें हैं। न्याय की कसौटी पर फैसला साक्ष्यों के आधार पर होता है और जब अभियोजन आरोप साबित नहीं कर पाता, तो आरोपी को कानून के तहत बरी होने का पूरा हक है।

रिपोर्ट- धर्मेंद्र रस्तोगी