Purnea Fake SIMs: फर्जी सिम से साइबर ठगी का खुलासा, दो POS एजेंट गिरफ्तार, सैकड़ों सिम का नेटवर्क उजागर

Purnea Fake SIMs: पूर्णिया में फर्जी सिम बेचकर साइबर ठगी कराने वाले दो POS एजेंट गिरफ्तार। सैकड़ों सिम से चल रहा था बड़ा साइबर फ्रॉड नेटवर्क।

 Purnea Fake SIMs
फर्जी सिम बेचकर साइबर ठगी- फोटो : social media

Purnea Fake SIMs: पूर्णिया जिले में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने फर्जी तरीके से सिम कार्ड जारी कर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने वाले दो पीओएस एजेंटों को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि गिरफ्तार दोनों आरोपी सगे भाई हैं और बनमनखी थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि ये आरोपी एक व्यक्ति के कागजात और फोटो का इस्तेमाल कर कई सिम कार्ड जारी कर देते थे और उन्हें साइबर ठगी करने वालों को बेच देते थे।

एक सिम के कागजात पर कई सिम, ठगी का नया तरीका

जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि आरोपितों ने एक ही व्यक्ति के दस्तावेज और तस्वीर के आधार पर कई सिम कार्ड निर्गत किए। अब तक की जांच में करीब 500 एयरटेल सिम कार्ड के फर्जी तरीके से जारी होने की बात सामने आई है। इन सिम कार्डों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड में किया जा रहा था। पुलिस ने एयरटेल कंपनी से इन सभी सिम कार्डों की पूरी जानकारी मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन-किन मामलों में इनका इस्तेमाल हुआ है।

कैसे खुला पूरा मामला

इस पूरे नेटवर्क का खुलासा तब हुआ, जब पूर्णिया न्यायालय में कार्यरत राहुल कुमार ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। राहुल कुमार ने बताया कि उनके पास मोबाइल नंबर 9006973701 से कॉल आया, जिसमें खुद को न्यायिक अधिकारी बताते हुए चिकित्सा आपातकाल के नाम पर पैसे मांगे गए। भरोसे में आकर उन्होंने 20 हजार रुपये भेज दिए, लेकिन बाद में पता चला कि यह पूरा मामला साइबर ठगी का है।

तकनीकी जांच से पहुंचे असली आरोपियों तक

पुलिस अधीक्षक स्वीटी सहरावत के निर्देश पर साइबर थाना और जिला आसूचना इकाई की एक विशेष टीम गठित की गई। साइबर डीएसपी चंदन कुमार ठाकुर के नेतृत्व में तकनीकी जांच की गई, जिसमें सामने आया कि जिस मोबाइल नंबर से ठगी की गई थी, वह अररिया जिले के एक व्यक्ति के नाम पर दर्ज है। जब पुलिस ने उस व्यक्ति से संपर्क किया, तो पता चला कि उसके साथ धोखा हुआ है और सिम पोर्ट कराने के नाम पर बनमनखी के रसाढ़ गांव के रहने वाले दो भाइयों ने नया सिम निकलवा लिया था।

गांव से हुई गिरफ्तारी

तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम रसाढ़ गांव पहुंची और दोनों भाइयों संतोष कुमार और रितेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से फर्जी तरीके से सिम कार्ड बेच रहे थे।

लाइसेंस रद्द होने के बाद भी जारी रहा खेल

जांच में यह भी सामने आया कि पहले बड़े भाई रितेश कुमार के नाम पर सिम बेचने का लाइसेंस था, लेकिन गड़बड़ियों की शिकायत के बाद एयरटेल ने उसका लाइसेंस रद्द कर दिया था। इसके बाद छोटे भाई संतोष कुमार के नाम पर नया लाइसेंस लिया गया और वही फर्जीवाड़ा जारी रखा गया।दोनों आरोपी बिना किसी से मिले ही ऑनलाइन माध्यम से सिम बेचते थे। एक सिम के बदले दो हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक वसूले जाते थे।

फेसबुक से हुई डील, बिना मिले बिकता था सिम

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि कई बार वे सिम लेने वाले व्यक्ति से मिले भी नहीं। सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक के जरिए संपर्क होता था और बातचीत के बाद सिम कार्ड बेच दिया जाता था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक व्यक्ति के दस्तावेजों पर कई सिम निकालकर बेचना उनका नियमित काम बन चुका था।

अन्य सिम विक्रेताओं पर भी शक

पुलिस जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि बनमनखी और जानकीनगर थाना क्षेत्र में दस से अधिक सिम विक्रेता इस तरह के फर्जीवाड़े में शामिल हो सकते हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।