नीतीश कुमार के गृह क्षेत्र बख्तियारपुर का बदलेगा नाम ! सीएम सम्राट चौधरी ने किया समर्थन
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बयान में नीतीश कुमार के गृह क्षेत्र बख्तियारपुर का नाम बदलने पर अपनी निजी सहमति जताई है. उन्होंने कहा, “एक दिन आएगा जब यह नाम बदल जाएगा।”
Bakhtiyarpur : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह क्षेत्र बख्तियारपुर का नाम जल्द ही बदल सकता है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बयान के बाद पटना जिले के बख्तियारपुर शहर का नाम बदलने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि फिलहाल सरकार के स्तर पर नाम बदलने का कोई तत्काल प्रस्ताव नहीं है, लेकिन वह व्यक्तिगत रूप से बख्तियारपुर का नाम बदले जाने के पक्ष में हैं। उन्होंने संकेत दिया कि “एक दिन आएगा जब यह नाम बदल जाएगा।” उनके इस बयान के बाद बिहार में इतिहास, राजनीति और शहर के नाम को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।
बख्तियारपुर का मुद्दा इसलिए भी खास है क्योंकि यह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जन्मस्थान और गृह क्षेत्र है। नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बख्तियारपुर में हुआ था। उनका पैतृक गांव कल्याण बिगहा के साथ ही बख्तियारपुर भी रहा है और उनके पुराने चुनावी दस्तावेजों में भी बख्तियारपुर स्थित पता दर्ज है।
नीतीश कुमार के लंबे शासन में भी नहीं बदला नाम
बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग नई नहीं है। खास बात यह है कि 2005 से 2026 तक बिहार की राजनीति में लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार के कार्यकाल में भी यह नाम नहीं बदला। दरअसल, 2021 में जब नीतीश कुमार से बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग को लेकर सवाल किया गया था, तब उन्होंने इस विचार को खारिज कर दिया था। उन्होंने इसे लेकर आपत्ति जताते हुए कहा था कि “क्यों नाम बदलेगा? यह मेरा जन्मस्थान है।”
यानी एक तरफ बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग समय-समय पर उठती रही, वहीं दूसरी ओर नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते हुए इस मांग को आगे नहीं बढ़ाया। अब सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बयान इस पुराने मुद्दे को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आया है।
मई 2026 में ‘मगध द्वार’ करने का प्रस्ताव
नाम बदलने की मांग को इस साल मई में उस समय नया जोर मिला, जब बख्तियारपुर नगर परिषद ने शहर का नाम बदलकर ‘मगध द्वार’ करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भेजा। नगर परिषद का तर्क था कि मौजूदा नाम का संबंध ऐतिहासिक आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी से जोड़ा जाता है। नगर परिषद का प्रस्ताव ऐसे समय आया जब नई सरकार ने पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान का नाम बदलकर पटना जू कर दिया था। इसके बाद बख्तियारपुर के नाम परिवर्तन की मांग ने भी जोर पकड़ लिया।
बख्तियार खिलजी के नाम पर है?
हालांकि इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इतिहास से जुड़ा है। बख्तियारपुर का नाम वास्तव में मुहम्मद बख्तियार खिलजी के नाम पर रखा गया था या नहीं, इस पर इतिहासकारों में मतभेद है। उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोत इस संबंध को पूरी तरह निर्णायक रूप से साबित नहीं करते। कुछ ऐतिहासिक अध्ययनों में बख्तियारपुर के नाम को बख्तियार खिलजी के बिहार अभियान से जोड़ा गया है, जबकि अन्य इतिहासकार इस दावे को लेकर सावधानी बरतते हैं। बख्तियार खिलजी का बिहार के इतिहास में जरूर महत्वपूर्ण और विवादित स्थान है। उसके बिहार अभियान को 12वीं-13वीं शताब्दी के संक्रमण काल से जोड़ा जाता है और नालंदा तथा ओदंतपुरी जैसे बौद्ध शिक्षा केंद्रों पर उसके हमलों का उल्लेख ऐतिहासिक स्रोतों में मिलता है।
नाम बदलने की पुरानी मांग
बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग पिछले कई वर्षों से राजनीतिक रूप से उठती रही है। 2018 में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी इस मुद्दे को उठाया था। 2019 में तत्कालीन भाजपा सांसद गोपाल नारायण सिंह ने राज्यसभा में बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर नालंदा या राजगीर जैसे ऐतिहासिक नाम से करने की मांग की थी। इससे पहले 2006 में भी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन के नाम परिवर्तन को लेकर केंद्र को पत्र भेजे जाने का उल्लेख मिलता है।
अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान के बाद सवाल यह है कि क्या ‘मगध द्वार’ के प्रस्ताव को सरकार आगे बढ़ाएगी या यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस तक ही सीमित रह जाएगा? फिलहाल सरकार की ओर से बख्तियारपुर का नाम बदलने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन इतना जरूर है कि नीतीश कुमार के जन्मस्थान और लंबे राजनीतिक सफर से गहरे जुड़े इस शहर के नाम को लेकर अब एक नया राजनीतिक अध्याय शुरू हो गया है।
रवि शंकर की रिपोर्ट