हरियाणा की धरती पर मिथिला का गौरव: गुरुग्राम में बनेगा पहला 'विद्यापति भवन', 24 मई को शाहनवाज हुसैन करेंगे शिलान्यास

गुरुग्राम में 24 मई को भूमिजा मैथिली मंच द्वारा विद्यापति भवन का शिलान्यास किया जाएगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन की उपस्थिति में होगा भव्य आयोजन

हरियाणा की धरती पर मिथिला का गौरव: गुरुग्राम में बनेगा पहला
गुरूग्राम में बनेगा विद्यापति भवन- फोटो : Dhiraj singh

New Delhi - मिथिलांचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मैथिली अस्मिता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने जा रही है। भूमिजा मैथिली मंच, गुरुग्राम के तत्वावधान में आगामी 24 मई 2026 को हरियाणा के पहले “विद्यापति भवन” का भव्य शिलान्यास समारोह आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।

मिथिला संस्कृति और सभ्यता का बनेगा प्रमुख केंद्र

आयोजकों का कहना है कि गुरुग्राम में बनने वाला यह भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि देश भर में रहने वाले मिथिला समाज के लोगों के लिए अस्मिता, भाषा और संस्कृति का प्रमुख केंद्र होगा। सोहना रोड पर स्थित यह भवन सामाजिक गतिविधियों, सांस्कृतिक आयोजनों और परस्पर सहयोग के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करेगा। हरियाणा की पावन भूमि पर इस तरह का यह पहला सांस्कृतिक केंद्र होगा।

24 मई को सजेगी मिथिला की शाम

विद्यापति समारोह और शिलान्यास का यह भव्य कार्यक्रम 24 मई (रविवार) को सायं 6:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक चलेगा। कार्यक्रम का आयोजन मारुति कुंज सोसायटी गेट के सामने, सोहना रोड, गुरुग्राम में किया जाएगा। इस अवसर पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी जो उपस्थित लोगों को मिथिला की माटी की खुशबू का एहसास कराएंगी।

गणमान्य हस्तियों का जुटेगा जमावड़ा

इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए बड़ी संख्या में मिथिलांचल समाज के प्रबुद्ध नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, साहित्यकार और सांस्कृतिक हस्तियां गुरुग्राम पहुंचेंगी। भूमिजा मैथिली मंच ने समस्त मिथिला समाज से अपील की है कि वे इस गौरवशाली क्षण में सहभागी बनें और अपनी गौरवमयी संस्कृति के नए केंद्र के निर्माण में अपना समर्थन दें।

गुरुग्राम बनेगा 'मिनी मिथिला'

सैकड़ों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद गुरुग्राम में रहने वाले लाखों प्रवासी मैथिलों के लिए यह भवन घर जैसा सुकून देगा। आयोजकों का लक्ष्य है कि आने वाली पीढ़ी अपनी भाषा और संस्कारों से जुड़ी रहे, जिसमें यह विद्यापति भवन एक सेतु (पुल) का कार्य करेगा।

रिपोर्ट - धीरज सिंह