कौशल विकास केंद्रों के बंद होने पर बवाल: संचालकों ने बीजेपी कार्यालय का किया घेराव, भाजपा प्रदेश कार्यालय पुलिस छावनी में तब्दील
राज्य सरकार द्वारा तकरीबन 1700 कौशल विकास केन्द्रों के बंद करने के फैसले के बाद इन केन्द्र के संचालकों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। पहले श्रम नियोजन कार्यालय और अब बीजेपी कार्यालय के इनलोगों ने प्रदर्शन किया है......
Patna : बिहार सरकार के महत्वाकांक्षी सात निश्चय कार्यक्रम के तहत संचालित कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) से जुड़े कौशल विकास केंद्रों के संचालकों का गुस्सा अब चरम पर पहुंच गया है। लगभग 1700 केंद्रों के बंद होने और 10 हजार से अधिक कर्मचारियों के बेरोजगार होने के विरोध में प्रदर्शनकारी संचालकों ने पटना स्थित भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रदेश कार्यालय का घेराव किया।
भाजपा प्रदेश कार्यालय बना पुलिस छावनी
बड़ी संख्या में संचालकों और ट्रेनरों के अचानक बीजेपी दफ्तर पहुंचने और विरोध-प्रदर्शन शुरू करने के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रदर्शनकारियों के उग्र तेवर और भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। देखते ही देखते पूरा बीजेपी कार्यालय पुलिस छावनी में तब्दील हो गया और भारी संख्या में पुलिस बल तथा वाटर कैनन की तैनाती कर दी गई।
रोजगार छीनने और टेंडर में गड़बड़ी के आरोप
प्रदर्शनकारी संचालकों का कहना है कि सरकार द्वारा पुराने केंद्रों को अचानक बंद कर दिया गया है, जिससे हजारों लोगों के सामने आजीविका का संकट पैदा हो गया है। संचालकों ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार नए सिरे से टेंडर निकालकर अपने पसंदीदा लोगों को काम सौंपने की साजिश रच रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता और केंद्रों को पुनः चालू नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
पुलिस के साथ तीखी बहस और धक्का-मुक्की
बीजेपी दफ्तर के बाहर प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान बैरिकेडिंग पर प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस और हल्की धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दफ्तर के आसपास के सभी रास्तों की घेराबंदी कर सुरक्षा सख्त कर दी।
हजारों युवाओं के भविष्य पर लटका ताला
कुशल युवा कार्यक्रम के तहत राज्य भर के युवाओं को कंप्यूटर, संवाद कौशल और व्यवहार कौशल का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाता था। केंद्रों के अचानक बंद होने से न केवल 10 हजार से ज्यादा कुशल ट्रेनर और कर्मचारी सड़क पर आ गए हैं, बल्कि लाखों प्रशिक्षणार्थी युवाओं की पढ़ाई भी अधर में लटक गई है।
गौरतलब है कि बीजेपी कार्यालय से पहले कौशल विकास केंद्रों के संचालकों ने पटना स्थित श्रम एवं नियोजन कार्यालय पर जमकर हंगामा किया था।
अनिल की रिपोर्ट