नए सीएम के शपथ लेते ही बिहार का दौरा करेंगे तेजस्वी ! राजद को सबसे बड़ा दल बनाने की खास रणनीति, इन पर नजर

नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से अलग होने के बाद तेजस्वी यादव खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में बिहार में पेश करने के लिए बड़ी रणनीति बना रहे हैं .

Tejashwi Yadav
Tejashwi Yadav - फोटो : news4nation

Tejashwi Yadav : बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बीच तेजस्वी यादव की सियासी हलचल भी एक बार फिर तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद प्रदेश में नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक 15 अप्रैल को नई सरकार का शपथ ग्रहण हो सकता है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनने की संभावना जताई जा रही है।


इधर, सत्ता परिवर्तन की आहट के बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी पूरी तरह सक्रिय मोड में नजर आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार नई सरकार के गठन के बाद तेजस्वी यादव राज्यव्यापी दौरे पर निकल सकते हैं। इस दौरान वह न सिर्फ आम जनता से संवाद करेंगे, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन को और धारदार बनाने की रणनीति तैयार करेंगे। तेजस्वी से जुड़े सूत्रों की मानें तो राजद का मानना है कि नीतीश कुमार की बिहार से विदाई के बाद अब सियासी मुकाबला मुख्य रूप से राजद और भाजपा के बीच ही होगा। जदयू का जनाधार कमजोर होना मानकर तेजस्वी अभी से एक नई सियासी बिसात बिछाने को आमदा हैं। 


परम्परागत वोटरों पर नजर 

तेजस्वी यादव फिलहाल राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और पार्टी को अगले चुनावों के लिए अभी से तैयार करने में जुटे हैं। बिहार विधानसभा में वर्तमान में राजद के 25 विधायक हैं। ऐसे में पार्टी की कोशिश है कि अपने कोर वोट बैंक यादव और मुस्लिम पर पकड़ को और मजबूत किया जाए। 2025 के विधानसभा चुनाव में राजद को मिली करारी हार के पीछे राजद से उसके परम्परागत वोटरों का दूर होना एक बड़ा कारण माना गया । 


सभी वर्गों को साधना 

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो 2025 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों का एक हिस्सा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM की ओर झुकता दिखा, जिससे राजद को कुछ सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा। यही वजह है कि अब तेजस्वी यादव मुस्लिम समुदाय के बीच फिर से विश्वास मजबूत करने पर जोर दे सकते हैं। वहीं राजद की छवि वे एक ऐसे दल के रूप में गढ़ना चाहते हैं जिसे लेकर सभी वर्गों में भरोसा जगे। 


नीतीश के बाद तेजस्वी 

वहीं, नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से अलग होने के बाद राज्य की राजनीति में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग (OBC-EBC) के वोटों को लेकर भी नई प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। अब तक इन वर्गों पर नीतीश कुमार की मजबूत पकड़ मानी जाती थी, लेकिन उनके हटने के बाद राजद इन वोटरों को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रही है। तेजस्वी को खुद को इन वर्गों के बीच एक विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकते हैं। 


राजद बनाम भाजपा 

ऐसे में आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति सीधी तौर पर भाजपा बनाम राजद के बीच सिमटती नजर आ सकती है। तेजस्वी यादव का प्रस्तावित दौरा इसी सियासी जमीन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

रंजन की रिपोर्ट