पटना हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी: वायु और ध्वनि प्रदूषण रोकने में विफल बोर्ड को फटकार, 6 थानेदारों को किया तलब
पटना हाईकोर्ट ने बिहार में बढ़ते प्रदूषण को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और 6 थानाध्यक्षों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने डीजे और लाउडस्पीकर पर नकेल कसने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
Patna - : राजधानी पटना सहित पूरे बिहार में बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) और स्थानीय पुलिस प्रशासन के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि बोर्ड प्रदूषण को नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल रहा है। जस्टिस राजीव रॉय की एकलपीठ ने सुरेंद्र प्रसाद द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की।
डीजे और लाउडस्पीकर पर ढुलमुल रवैये से नाराज हुआ कोर्ट
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शहर में शोर-शराबे (ध्वनि प्रदूषण) की खतरनाक स्थिति पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि शादी समारोहों और जुलूसों में डीजे व लाउडस्पीकर का बेधड़क इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। बोर्ड के वरिष्ठ अधिवक्ता शिवेंद्र किशोर ने बताया कि मैरिज हॉलों को नोटिस जारी किए गए हैं और निर्माण सामग्री ढोने के लिए 'ग्रीन नेट' का नियम बनाया गया है। हालांकि, न्यायमित्र अधिवक्ता अजय ने कोर्ट को बताया कि स्थानीय निकायों के साथ समन्वय का कोई पुख्ता रिकॉर्ड बोर्ड के पास नहीं है।
6 थानों की रिपोर्ट 'असंतोषजनक', 19 जून को सशरीर पेशी का आदेश
कोर्ट ने राजधानी के कई प्रमुख थानों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कदमकुआं, पीरबहोर, आलमगंज, रूपसपुर, गांधी मैदान और बुद्ध कॉलोनी के थाना प्रभारियों द्वारा पेश की गई रिपोर्ट को कोर्ट ने असंतोषजनक पाया। जस्टिस राजीव रॉय ने इन सभी 6 थानाध्यक्षों को 19 जून 2026 को पूरी 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' के साथ व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने का सख्त आदेश दिया है। इसके अलावा राजीव नगर और छपरा सदर के थानाध्यक्षों को भी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
कार्रवाई का व्यावहारिक तरीका: 'पहले वीडियोग्राफी, फिर गिरफ्तारी'
पुलिस की निष्क्रियता पर कोर्ट ने एक व्यावहारिक सुझाव भी दिया। कोर्ट ने कहा कि अक्सर बारात या धार्मिक जुलूस के बीच में कार्रवाई करने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। इसलिए पुलिस को चाहिए कि नियमों का उल्लंघन करने वाले डीजे और लाउडस्पीकर की पहले वीडियोग्राफी कर ली जाए। जैसे ही जुलूस या कार्यक्रम समाप्त हो, उस वीडियो साक्ष्य के आधार पर संबंधित पक्षों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
ई-रिक्शा और टेम्पो में बजने वाले अश्लील गानों पर भी नजर
सुनवाई के दौरान वकीलों ने कोर्ट का ध्यान पटना सिटी, भूतनाथ रोड और अन्य इलाकों में चलने वाले टेम्पो व ई-रिक्शा की ओर भी खींचा। कोर्ट को बताया गया कि इन वाहनों में चालक काफी तेज आवाज में टेप बजाते हैं, जिससे महिला यात्रियों और बुजुर्गों को भारी असुविधा होती है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि इस तरह के 'असभ्य कृत्यों' पर भी अंकुश लगाया जाए।
क्या कहता है लाउडस्पीकर अधिनियम 1955?
कोर्ट ने पुलिस को उनके अधिकारों की याद दिलाते हुए लाउडस्पीकर अधिनियम 1955 का हवाला दिया:
जब्ती का अधिकार: एएसआई (ASI) या उससे ऊपर रैंक का कोई भी अधिकारी नियम तोड़ने पर लाउडस्पीकर जब्त कर सकता है।
समय की पाबंदी: रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच बिना जिलाधिकारी की लिखित अनुमति के लाउडस्पीकर बजाना पूर्णतः प्रतिबंधित है।
कोर्ट ने सुझाव दिया कि जनता में जागरूकता लाने के लिए 'रन फॉर पॉल्यूशन' जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। मामले की अगली सुनवाई अब 19 जून 2026 को होगी।