Bihar Politics: बांकीपुर की हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल में ऑपरेशन कायाकल्प, प्रदेश से पंचायत तक पूरी कमेटियां भंग, तेजस्वी ने वफादार चेहरों पर दांव की तैयारी

Bihar Politics:राष्ट्रीय जनता दल ने संगठन में बड़े फेरबदल की कवायद शुरू कर दी है। तेजस्वी यादव के निर्देश पर प्रदेश कमेटी से लेकर जिलों, प्रखंडों, पंचायतों और पार्टी की विभिन्न इकाइयों को भंग किए जाने की बात सामने आई है। ...

Tejashwi Dissolves RJD Units Across Bihar Plans Major Organi
RJD में ऑपरेशन कायाकल्प- फोटो : reporter

Bihar Politics:  बांकीपुर उपचुनाव में झटके और पार्टी के भीतर से उठ रही असंतोष की आवाजों के बीच राष्ट्रीय जनता दल  ने संगठन में बड़े फेरबदल की कवायद शुरू कर दी है। तेजस्वी यादव के निर्देश पर प्रदेश कमेटी से लेकर जिलों, प्रखंडों, पंचायतों और पार्टी की विभिन्न इकाइयों को भंग किए जाने की बात सामने आई है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व अब संगठन की जमीनी कमजोरियों को दूर कर नए सिरे से मजबूत ढांचा खड़ा करने की तैयारी में है।

बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों के साथ-साथ वरिष्ठ नेताओं के तीखे बयानों ने भी पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ाई है। सूत्रों के मुताबिक, जिन जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों की इकाइयां बूथ और पंचायत स्तर तक प्रभावी कमेटियां खड़ी करने में विफल रही हैं, उन्हें नई टीम में जगह मिलने की संभावना कम है। नेतृत्व संगठन को केवल कागज पर नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक सक्रिय और जवाबदेह बनाना चाहता है।

वोट बैंक और डेटा को लेकर बढ़ी चिंता

RJD के सामने एक बड़ी चुनौती मुस्लिम वोट बैंक को लेकर भी बताई जा रही है। जन सुराज पार्टी की सक्रियता और हाल में पार्टी कार्यकर्ताओं से जुड़े डेटा के कथित तौर पर लीक होने की खबरों ने नेतृत्व को सतर्क कर दिया है। पार्टी अब संगठनात्मक स्तर पर किसी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही है।चर्चा है कि तेजस्वी यादव नई टीम में वफादार, सक्रिय, जमीनी पकड़ वाले और भरोसेमंद नेताओं को प्राथमिकता दे सकते हैं। संगठन के पुनर्गठन की रणनीति तैयार करने में उनके विश्वसनीय नेताओं की अहम भूमिका रहने की संभावना है।

भोला यादव, अब्दुल बारी सिद्दीकी और सुनील सिंह की भूमिका अहम

नई कोर टीम तैयार करने की जिम्मेदारी तेजस्वी यादव ने अपने भरोसेमंद रणनीतिकारों को सौंपने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इनमें भोला यादव, अब्दुल बारी सिद्दीकी और सुनील कुमार सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। इन नेताओं की सलाह, संगठनात्मक अनुभव और जिलों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर नई प्रदेश एवं जिला टीम का खाका तैयार किए जाने की चर्चा है।

तेजस्वी यादव के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक समीकरण के साथ-साथ संगठन में भरोसा बहाल करने की है। पार्टी मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत रखने के साथ-साथ पुराने और वफादार नेताओं को भी नई जिम्मेदारियों में जगह देने की रणनीति पर आगे बढ़ सकती है।

तीन मोर्चों पर फोकस, हार का हिसाब भी होगा

बांकीपुर के झटके के बाद  राष्ट्रीय जनता दल  की रणनीति मुख्य रूप से तीन मोर्चों पर केंद्रित मानी जा रही है। पहला, हार का आत्ममंथन—यह तय करना कि वरिष्ठ नेताओं और युवा कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता कहां रही और इसकी जवाबदेही किसकी बनती है।दूसरा, पूरे संगठन का पुनर्गठन—बूथ से प्रदेश स्तर तक सक्रिय और विश्वसनीय चेहरों की टीम तैयार करना। तीसरा, आक्रामक जन आंदोलन कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और जनहित से जुड़े मुद्दों पर नीतीश-सम्राट सरकार को घेरना।करीब एक महीने की विदेश यात्रा से लौटने के बाद तेजस्वी यादव की राजनीतिक सक्रियता भी बढ़ी है। उन्होंने सेक्स रैकेट के खिलाफ आवाज उठाने वाले बंटी यादव की हत्या के करीब पखवाड़े बाद उनके परिजनों से मुलाकात कर पांच लाख रुपये की सहायता भी दी।संगठन में बदलाव के साथ तेजस्वी ने विपक्षी एकता की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बिहार आने का न्योता दिए जाने की बात सामने आई है।दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव में RJD समेत भाजपा को भी पीछे छोड़कर राजनीतिक समीकरणों को झटका दिया। ऐसे में RJD का संगठनात्मक पुनर्गठन महज कमेटियां बदलने की कवायद नहीं, बल्कि खिसकते जनाधार को थामने और आगामी राजनीतिक लड़ाई के लिए पार्टी को नए सिरे से तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

रिपोर्ट- रंजन कुमार सिंह