बाढ़ अनुमंडल अस्पताल का हाल : 4 एंबुलेंस होने के बाद भी तड़पती रही रेफर मासूम मरीज
Patna : बिहार के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री द्वारा सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने और गंभीर मरीजों को अनुमंडल स्तर पर ही मुकम्मल इलाज देने के प्रयास बाढ़ में खोखले साबित हो रहे हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा करीब 25 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से उद्घाटित 100 बेड वाले नए अनुमंडलीय अस्पताल भवन की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा रही हैं। अस्पताल में जीवन रक्षक संसाधनों की उपलब्धता के बड़े वादों के बीच जमीनी हकीकत आज भी असंवेदनशील बनी हुई है।
रेफर होने के बाद भी नहीं मिली एंबुलेंस
अस्पताल की घोर लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला उस समय सामने आया जब करीब 15 वर्ष की एक बच्ची रिया कुमारी (पिता- शिव शंकर प्रसाद) गंभीर हालत में अनुमंडल अस्पताल आई। ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों ने बच्ची की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत पटना रेफर कर दिया। लेकिन विडंबना देखिए कि रेफर किए जाने के बाद भी करीब 3 घंटे से अधिक समय तक मासूम मरीज को एंबुलेंस मुहैया नहीं कराई जा सकी। इस दौरान बच्ची इमरजेंसी वार्ड में ऑक्सीजन के सहारे अपनी जिंदगी की उल्टी गिनती गिनती रही।
अस्पताल परिसर में छिपाई गईं एंबुलेंस
सबसे शर्मनाक बात यह रही कि अनुमंडल अस्पताल परिसर में कुल चार एंबुलेंस मौजूद होने के बावजूद परिजनों को एंबुलेंस के लिए भीख मांगनी पड़ी। कथित तौर पर एंबुलेंस चालकों ने अस्पताल के पुराने भवन के पीछे तीन एंबुलेंस को छिपाकर खड़ा कर दिया था ताकि उन्हें ड्यूटी पर न जाना पड़े। लाचार परिजन एंबुलेंस की गुहार लेकर लगातार कार्यालय के चक्कर काटते रहे और अधिकारियों के सामने हाथ जोड़ते रहे, लेकिन अस्पताल प्रशासन का दिल नहीं पसीजा और बच्ची तड़पती रही।
सिविल सर्जन में मामले को बेहद गंभीरता से लिया, तुरंत मोकामा से बुलाया एंबुलेंस
इस पूरे संवेदनशील मामले पर जब बाढ़ अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विनय कुमार चौधरी से बात करने की कोशिश की गई, तो उनकी ओर से कोई भी सार्थक या संतोशजनक जवाब नहीं मिला। अस्पताल प्रशासन की इस अकर्मण्यता के बाद जब सीधे पटना के सिविल सर्जन से संपर्क साधा गया, तो उन्होंने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। सिविल सर्जन के कड़े निर्देश के बाद मोकामा से एक अन्य एंबुलेंस को आपातकालीन स्थिति में बाढ़ बुलवाया गया।
4 घंटे बाद पटना रेफर हो सकी बच्ची
अस्पताल प्रबंधन की इस घोर लापरवाही के कारण बच्ची को समय पर इलाज मिलने में करीब 4 घंटे की देरी हुई। आखिरकार मोकामा से आई एंबुलेंस के जरिए बच्ची को बेहद गंभीर स्थिति में पटना भेजा गया। इस घटना ने अनुमंडलीय अस्पताल बाढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि सरकारी दावों को ठेंगा दिखाने वाले और एंबुलेंस छिपाने वाले दोषी चालकों व गैर-जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मियों पर प्रशासन क्या सख्त कार्रवाई करता है।
रवि शंकर की रिपोर्ट