India Population Growth: चीन-जापान की सबसे बड़ी परेशानी! बिहार के लिए बन सकती है सबसे बड़ा मौका, जानें क्या है पूरा खेल?

India Population Growth: SRS 2024 रिपोर्ट के अनुसार बिहार की प्रजनन दर देश में सबसे ज्यादा 2.9 है। जानिए कैसे बिहार भविष्य में भारत को जनसंख्या संकट और श्रमिकों की कमी से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

India Population Growth
बिहार जवान है!- फोटो : freepik

India Population Growth: भारत में जनसंख्या को लेकर लंबे समय तक सबसे बड़ी चिंता जनसंख्या बढ़ने की रही है। लेकिन अब दुनिया के कई देशों में एक नई समस्या तेजी से सामने आ रही है। यह समस्या है जनसंख्या में लगातार गिरावट और आबादी के तेजी से बूढ़े होने की। ऐसे समय में बिहार का नाम एक अलग वजह से चर्चा में है।

सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सभी राज्यों में बिहार की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate) सबसे ज्यादा 2.9 है। इसके बाद उत्तर प्रदेश 2.6 और मध्य प्रदेश 2.4 के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। यह आंकड़े देश की औसत प्रजनन दर 1.9 और रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से काफी ऊपर हैं।

बिहार की अधिक जनसंख्या वृद्धि 

आमतौर पर बिहार की अधिक जनसंख्या वृद्धि को गरीबी, शिक्षा की कमी, महिलाओं पर बढ़ते बोझ और परिवार नियोजन को कम अपनाने जैसे कारणों से जोड़ा जाता है। ये चुनौतियां अपनी जगह मौजूद हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यही स्थिति भविष्य में भारत को एक बड़ी जनसंख्या संकट से बचाने में मदद कर सकती है।

विकासशील देश जनसंख्या घटने की समस्या से जूझ रहे

आज दुनिया के कई विकसित और विकासशील देश जनसंख्या घटने की समस्या से जूझ रहे हैं। जब किसी देश में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या लगातार कम हो जाती है, तो धीरे-धीरे काम करने वाली आबादी कम होने लगती है और बुजुर्गों की संख्या बढ़ जाती है। इससे आर्थिक विकास पर असर पड़ता है, उत्पादन घटता है और सरकारों पर पेंशन तथा स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च बढ़ जाता है।

चीन की प्रजनन दर 

चीन इसका सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। वर्ष 1990 में चीन की प्रजनन दर प्रति महिला 2.5 थी, जो 2025 तक घटकर 0.93 रह गई। RAND Corporation के अनुमान के अनुसार, चीन की कार्यशील आबादी 2015 में अपने उच्चतम स्तर पर थी और 2050 तक इसमें लगभग एक-चौथाई की कमी आ सकती है। इसके साथ ही चीन में बच्चों और बुजुर्गों पर निर्भर आबादी का बोझ भी तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2010 में कुल निर्भरता अनुपात 54 प्रतिशत था, जो 2050 तक 72 प्रतिशत से अधिक पहुंचने का अनुमान है। इसका मतलब है कि काम करने वाले लोगों को पहले की तुलना में कहीं अधिक लोगों का आर्थिक भार उठाना पड़ेगा।

जापान और दक्षिण कोरिया में जन्म दर

जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं। दक्षिण कोरिया में जन्म दर दुनिया की सबसे कम दरों में शामिल है। McKinsey की एक स्टडी के अनुसार, यदि यही स्थिति बनी रही तो चीन की आबादी वर्ष 2100 तक 1.4 अरब से घटकर केवल 40.6 करोड़ रह सकती है। वहीं दक्षिण कोरिया की आबादी 5.2 करोड़ से घटकर 1.4 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसके मुकाबले भारत की स्थिति अलग दिखाई देती है। अनुमान है कि वर्ष 2100 तक भारत की आबादी घटकर 99.1 करोड़ रह सकती है। यह संख्या तब भी चीन की संभावित आबादी से दोगुनी से अधिक होगी। इसके पीछे एक बड़ी वजह बिहार जैसे राज्य हैं, जहां अभी भी युवाओं और बच्चों की संख्या काफी अधिक है।

SRS 2024 की रिपोर्ट

SRS 2024 रिपोर्ट के अनुसार, बिहार की 31.5 प्रतिशत आबादी 15 वर्ष से कम उम्र की है। यह देश में सबसे अधिक है। इसके बाद मध्य प्रदेश में यह आंकड़ा 27.4 प्रतिशत और राजस्थान में 27.3 प्रतिशत है। दूसरी ओर, तमिलनाडु में 15 वर्ष से कम उम्र की आबादी केवल 18 प्रतिशत और केरल में 19 प्रतिशत है। यही कारण है कि भले ही भविष्य में बिहार की प्रजनन दर धीरे-धीरे कम हो जाए, फिर भी यहां की युवा आबादी आने वाले कई दशकों तक जनसंख्या वृद्धि को बनाए रख सकती है। क्योंकि भविष्य में माता बनने वाली बड़ी संख्या में लड़कियां पहले से ही जन्म ले चुकी हैं।

बिहार में बुजुर्ग आबादी का अनुपात  कम

बिहार की एक और खास बात यह है कि यहां बुजुर्ग आबादी का अनुपात अभी काफी कम है। राज्य में केवल 7.8 प्रतिशत लोग 60 वर्ष से अधिक उम्र के हैं। इसके विपरीत, केरल में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की हिस्सेदारी 15.1 प्रतिशत है, जो देश में सबसे ज्यादा है।

भारत की रफ्तार किस मामले में होगी कम?

दुनिया भर में एक और चिंता काम करने वाली आबादी और बुजुर्गों के अनुपात को लेकर है। वर्ष 1950 में चीन में हर एक बुजुर्ग के  लिए 16 कामकाजी लोग थे। अनुमान है कि 2100 तक यह संख्या घटकर केवल दो रह जाएगी। जापान और दक्षिण कोरिया में भी यह अनुपात तेजी से गिर रहा है। भारत में भी यह अनुपात समय के साथ कम होगा, लेकिन इसकी रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रहने की संभावना है। इसका कारण यह है कि बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में अभी भी बड़ी युवा आबादी मौजूद है।

भारत के कई राज्य में जन्म दर कम

भारत के कई विकसित और समृद्ध राज्यों में अब कम जन्म दर चिंता का विषय बन चुकी है। आंध्र प्रदेश जैसे कुछ राज्यों ने अधिक बच्चों वाले परिवारों को प्रोत्साहन देने के प्रस्ताव भी दिए हैं। लेकिन दुनिया के कई देशों का अनुभव बताता है कि जब कोई समाज अधिक शिक्षित, शहरी और समृद्ध हो जाता है, तो केवल आर्थिक प्रोत्साहन देकर जन्म दर बढ़ाना आसान नहीं होता। ऐसी स्थिति में कई देशों को अपनी कार्यशील आबादी बनाए रखने के लिए दूसरे देशों से प्रवासियों को बुलाना पड़ता है। भारत में हालांकि स्थिति अलग हो सकती है। बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्य आने वाले वर्षों में देश के अन्य राज्यों को बड़ी संख्या में कामगार उपलब्ध कराते रह सकते हैं।

बिहार के लाखों लोग बाहर कर रहे काम

बिहार के लाखों लोग पहले से ही रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में देश के विभिन्न हिस्सों में काम कर रहे हैं। भविष्य में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है। वे उद्योगों, सेवा क्षेत्र, निर्माण कार्य, स्वास्थ्य सेवाओं और बुजुर्गों की देखभाल जैसे क्षेत्रों में अहम योगदान दे सकते हैं। साथ ही वे टैक्स के जरिए भी अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि बिहार हमेशा गरीब बना रहे या उसकी प्रजनन दर हमेशा ऊंची बनी रहे। शिक्षा, आर्थिक विकास और महिलाओं के सशक्तिकरण के साथ जन्म दर में कमी आना स्वाभाविक है। लेकिन वर्तमान में बिहार की प्रति व्यक्ति आय 66,828 रुपये है, जो देश की औसत प्रति व्यक्ति आय 2,15,936 रुपये से काफी कम है। यहां तक कि उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 1,07,468 रुपये है, जो बिहार से अधिक है।

 मौर्य काल के दौरान बिहार भारत की समृद्धि

गरीबी और प्रजनन दर के बीच गहरा संबंध माना जाता है। इसलिए जब तक बिहार आर्थिक रूप से अधिक विकसित नहीं होता, तब तक यहां जनसंख्या वृद्धि अपेक्षाकृत अधिक बनी रह सकती है। इतिहास में मौर्य काल के दौरान बिहार भारत की समृद्धि, संस्कृति और ज्ञान का प्रमुख केंद्र था। आज भले ही उसकी स्थिति अलग हो, लेकिन बदलती वैश्विक जनसंख्या परिस्थितियों में बिहार भविष्य में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जब दुनिया के कई देश घटती आबादी और बढ़ती बुजुर्ग आबादी की समस्या से जूझ रहे होंगे, तब बिहार भारत को नई कार्यशील आबादी उपलब्ध कराने वाली एक महत्वपूर्ण ताकत बन सकता है।