अनंत सिंह के मोकामा में 'रोहिंग्या' संकट ! मुश्किल में फंसे सैंकड़ों लोग, रो-रोकर अस्तित्व बचाने की अपील

पटना जिले के मोकामा प्रखंड के कसहा पंचायत के लोगों के सामने 'रोहिंग्या' संकट उत्पन्न हो गया है, स्थिति है कि उन्हें अपने अस्तित्व के खत्म होने का डर सताने लगा है.

Rohingya crisis in Mokama Kasaha Panchayat
Rohingya crisis in Mokama Kasaha Panchayat - फोटो : news4nation

Mokama : पटना जिले के मोकामा के सैंकड़ों नागरिकों के लिए एक किस्म का 'रोहिंग्या' संकट उत्पन्न हो गया है। यह वही मोकामा है जहां के विधायक बाहुबली अनंत सिंह और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह इस क्षेत्र के सांसद हैं। 'रोहिंग्या' संकट से जूझते लोग मतदाता मोकामा विधानसभा क्षेत्र के, प्रखंड मोकामा, थाना मरांची, जिला पटना, राशन कार्ड मोकामा प्रखंड का,आधार कार्ड में पता पटना जिला का लेकिन उनकी जनगणना होगी बेगूसराय जिले में। यह मामला मोकामा प्रखंड के कसहा दियारा पंचायत का है। और मोकामा के प्रखंड विकास पदाधिकारी भी इन लोगों की जनगणना मोकामा में नहीं होने को सही मानते हैं। वहीं प्रभावित लोग अपने लिए इसे 'रोहिंग्या' संकट बता रहे हैं। 


दरअसल, पटना जिले मोकामा के कसहा पंचायत के वार्ड नंबर 1, शिवनगर के करीब पचास परिवारों की जनगणना करने से मोकामा प्रखंड के जनगणना कर्मियों ने मना कर दिया। उनका कहना है कि उनका घर बेगूसराय जिले में आता है। ग्रामीण बेहद परेशान हैं और इसका विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनका सारा दस्तावेज पटना जिला का है, वे वोट मोकामा विधानसभा में देते हैं, घटना दुर्घटना होने पर पटना जिला के मरांची थाना की पुलिस आती है तो फिर वो बेगूसराय जिले में क्यों जाएंगे। 


सीमा विवाद बड़ी वजह 

पटना और बेगूसराय जिले के बीच सीमा क्षेत्र को लेकर लंबे समय से ये विवाद चल रहा है। मोकामा प्रखंड के अधिकारियों की निष्क्रियता की वजह से धीरे धीरे कसाहा दियारा पंचायत के कई हिस्सों पर बेगूसराय जिले के द्वारा कब्जा जमाया जा रहा है। पंचायत के मुखिया दिवाकर निषाद कहते हैं कि उन्हें झांसा देकर बेगूसराय जिले के बरौनी अंचल के अधिकारियों ने उनके पंचायत की जमीन पर स्कूल और विद्युत शवदाह गृह बना दिया है। पिछले दिनों ही कसहा में बने विद्युत शवदाह गृह का केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने उदघाटन भी किया था जबकि जिस जमीन पर इसका निर्माण हुआ है वह पटना जिले में आता है। लेकिन वहां बेगूसराय जिले से जुड़ा निर्माण कार्य हुआ है।


पुरखे पटना के अब अस्तित्व पर संकट 

दिवाकर निषाद कहते हैं कि इस संबंध में मोकामा अंचलाधिकारी को लिखित सूचना दिए लेकिन किसी अधिकारी ने इस मामले पर ध्यान नहीं दिया। इस संबंध में बात करने पर मोकामा के प्रखंड विकास पदाधिकारी रवि कुमार कहते हैं कि उन लोगों का घर बेगूसराय जिले में है तो उनकी जनगणना मोकामा में कैसे होगी। हालांकि स्थानीय लोग अपने दस्तावेज दिखाकर इस बात को साबित करने में लगे हैं कि आजादी के बाद से ही उनकी पहचान मोकामा यानी पटना जिले के निवासी के रूप में रही है। अब अचानक से उन्हें मोकामा प्रखंड का नहीं माना जा रहा है। वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हो गए हैं। उन्होंने कहा कि वे पटना जिलाधिकारी से अनुरोध करते हैं कि उनकी इस समस्या का समाधान हो। 


रोहिंग्या जैसी स्थिति 

मोकामा के कसहा के लोगों को डर है कहीं उनकी स्थिति 'रोहिंग्या' की तरह ना हो जाए। दरअसल, रोहिंग्या मुख्य रूप से म्यांमार के रखाइन प्रांत में रहने वाला एक मुस्लिम समुदाय है। म्यांमार सरकार उन्हें देश के आधिकारिक जातीय समूहों में शामिल नहीं मानती और लंबे समय से “बांग्लादेश से आए प्रवासी” बताती रही है। इसी कारण रोहिंग्या समुदाय दशकों से नागरिकता, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवाजाही जैसे अधिकारों के संकट का सामना कर रहा है। कसहा पंचायत के प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्हें भी डर सता रहा है कि उनकी स्थिति कहीं रोहिंग्या की तरह ना हो जाए। उनके सारे दस्तावेज और अधिकार पटना जिले के नागरिक के रूप में है लेकिन जनगणना में उन्हें शामिल ही नहीं किया जा रहा है। यह भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। 


ललन सिंह और अनंत सिंह से अपील 

कसहा पंचायत के वार्ड नंबर 1, शिवनगर के प्रभावित परिवार केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और मोकामा विधायक अनंत सिंह से भी अपील कर रहे हैं उनकी इस विकट समस्या को देखा जाए। जब वे लोग मोकामा विधानसभा और मुंगेर संसदीय क्षेत्र के मतदाता हैं तो अचानक से उन्हें जनगणना में पटना जिले में शामिल क्यों नहीं किया गया है।