Bihar Politics: तो लालू यादव ने इसलिए नहीं दी इफ्तार पार्टी...राजद ने तोड़ी 20 साल पुरानी परंपरा तो जदयू ने कर दिया बड़ा खुलासा

Bihar Politics: तो लालू यादव ने इसलिए नहीं दी इफ्तार पार्टी.

Bihar Politics:  राजद सुप्रीमो लालू यादव ने अपनी 20 साल पुरानी परंपरा तोड़ दी है। इस बार राबड़ी आवास पर इफ्तार पार्टी नहीं दी गई है। रमजान के दौरान 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी देवी के आवास पर भव्य इफ्तार का आयोजन किया जाता था। जिसमें पार्टी के शीर्ष नेता, कार्यकर्ता और विभिन्न दलों के नेता शामिल होते थे। नेता सत्ता पक्ष के हो या विपक्ष के लालू यादव के इफ्तार पार्टी में सभी शामिल होते थे। लेकिन इस बार राबड़ी आवास पर खामोशी पसरा रहा। वहीं अब इसको लेकर जदयू ने बड़ा खुलासा किया है।  

जदयू का राजद पर हमला 

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि, राबड़ी देवी पहले छठ करती थी लेकिन अब छठ में भी दरवाजा बंद रहता है स्वास्थ्य संबंधित कारण है लेकिन बंद रहता है। रमजान के महीने के बाद ईद का कार्यक्रम होता है उस दिन भी लापता हैं। इफ्तार देने की जो उनकी परंपरा थी अब वो भी नहीं रही। इसको हम राजनीतिक चश्मा से नहीं देख रहे लेकिन कोर्ट कचहरी का चक्कर तो पहले से था। जब से राजनीति में भ्रष्टाचार का आरोप लगा है तब से दंडवत होते रहे हैं। दरअसल, राजद की ओर से कहा गया है कि कोर्ट कचहरी और डॉक्टर के कारण इफ्तार पार्टी का आयोजन नहीं हो सका है। 

आयोजन नहीं मिला इसलिए 

वहीं इसके बाद नीरज कुमार ने कहा कि, लालू यादव को आयोजक नहीं मिला होगा इसलिए इफ्तार का आयोजन नहीं हुआ होगा। कोई आयोजक रहेगा तब ही ना इफ्तार देंगे। ये अपना नहीं, बाकी सब ठीक है। बड़ा बड़ा कार्यक्रम होगा लेकिन आयोजक कौन है। कार्यक्रम राजद का होगा लेकिन आयोजक कोई और होगा तो इफ्तार पार्टी के लिए कोई मिला नहीं होगा। नीरज कुमार ने आगे कहा कि ईद के दिन भी लापता हैं। राज्यसभा चुनाव हारने के बाद तेजस्वी यादव कहां है ये भी किसी को नहीं पता है। 

20 साल पुरानी परंपरा लालू परिवार ने तोड़ी 

पिछले साल इफ्तार पार्टी का आयोजन अब्दुल बारी सिद्दीकी के सरकारी आवास पर किया गया था, जिसमें तेजस्वी यादव समेत कई बड़े नेता शामिल हुए थे। वह आयोजन भी RJD की ओर से ही किया गया था। हालांकि इस बार न तो राबड़ी आवास, न ही अब्दुल बारी सिद्दीकी के आवास और न ही पार्टी कार्यालय में कोई इफ्तार पार्टी आयोजित की गई। बताया जा रहा है कि करीब 20 साल पुरानी यह परंपरा पहली बार टूटी है। 

पटना से रंजन की रिपोर्ट