Bihar Teacher news - शिक्षकों के 'अरमानों' पर विभाग का बुलडोजर: बैक डेट से वेतनमान की मांग खारिज, आदेश जारी

बिहार शिक्षा विभाग ने बी.एड. डिग्रीधारी शिक्षकों के 'बैक डेट' से प्रशिक्षित वेतनमान पाने के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की मांग को खारिज कर दिया है।

Bihar Teacher news - शिक्षकों के 'अरमानों' पर विभाग का बुलडो

Patna : प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि केवल बी.एड. डिग्री होने से शिक्षक नियुक्ति तिथि से प्रशिक्षित वेतनमान के हकदार नहीं हो जाते। एन.आई.ओ.एस. सेतु पाठ्यक्रम पूर्ण करने की तिथि ही आधार होगी।

पुरानी नज़ीर का हवाला देना पड़ा भारी 

बिहार के शिक्षा विभाग ने एक कड़ा रुख अख्तियार करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि बी.एड. पास प्राथमिक शिक्षक अपनी नियुक्ति की तारीख से प्रशिक्षित वेतनमान का दावा नहीं कर सकते । विभाग ने श्री देवेन्द्र कुमार यादव और अन्य बनाम बिहार सरकार मामले में राज्य अपीलीय प्राधिकार के आदेश के आलोक में सुनवाई की और शिक्षकों के सभी तर्कों को 'आधारहीन' करार दिया । शिक्षकों ने एल.पी.ए. संख्या-1699/2013 (क्रांति कनक केस) का हवाला देकर समान लाभ की मांग की थी, जिसे विभाग ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह आदेश केवल विशेष परिस्थितियों के लिए था और सामान्य रूप से लागू नहीं होता 

नियमों की सख्त व्याख्या: बी.एड. काफी नहीं 

प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने अपने आदेश में एन.सी.टी.ई. (NCTE) की अधिसूचनाओं का हवाला देते हुए कहा कि कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षकों के लिए बी.एड. के साथ-साथ 6 महीने का विशेष सेतु पाठ्यक्रम (Bridge Course) अनिवार्य है । विभाग का तर्क है कि बी.एड. को डी.पी.ई. या डी.एल.एड. के समरूप नहीं माना जा सकता और न ही नियमावली 2012 में ऐसा कोई प्रावधान है कि प्रशिक्षण पूर्ण करने से पहले प्रशिक्षित वेतनमान दिया जाए । विभाग ने साफ किया कि जब तक शिक्षक अनिवार्य प्रशिक्षण प्राप्त नहीं कर लेता, वह पूर्ण रूप से 'प्रशिक्षित' की श्रेणी में नहीं आता 

पुराने लाभ भी हुए वापस, बदला गया आदेश 

हैरानी की बात यह है कि विभाग ने अपने ही पूर्व के एक उदार आदेश को पलट दिया है। आदेश में उल्लेख है कि सी.डब्लू.जे.सी. सं.-9416/2019 के अनुपालन में पहले कुछ शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से लाभ दिया गया था, लेकिन अब विभाग ने ज्ञापांक-1017 दिनांक 12.03.2026 के माध्यम से उस व्यवस्था को पुनरीक्षित (Revise) करते हुए दावों को अस्वीकृत कर दिया है । यह कदम उन हजारों शिक्षकों के लिए खतरे की घंटी है जो 'बैक डेट' से एरियर मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे।

इन शिक्षकों पर गिरी गाज, दावे हुए धड़ाम 

इस आदेश से मुख्य रूप से कैमूर जिले के पांच शिक्षकों—देवेन्द्र कुमार यादव, शैलेश कुमार सिंह, सुनील कुमार, अभिषेक बहादुर सिंह और प्रशान्त कुमार सिंह की उम्मीदें धराशायी हो गई हैं । इन शिक्षकों की नियुक्ति 2014 में हुई थी और इन्होंने 2019 में विशेष प्रशिक्षण पूरा किया था । विभाग ने स्पष्ट किया कि उन्हें प्रशिक्षण उत्तीर्ण करने की तिथि (26.12.2019) से ही लाभ मिलेगा, न कि 2014 से । विभाग ने यह भी पाया कि प्रशिक्षण में देरी के लिए सरकार की ओर से कोई दोष नहीं था 

प्रशासनिक सख्ती और भविष्य के संकेत 

निदेशक, प्राथमिक शिक्षा विक्रम विरकर द्वारा हस्ताक्षरित यह आदेश यह संकेत देता है कि विभाग अब वित्तीय बोझ और नियमों की गलत व्याख्या को बर्दाश्त नहीं करेगा । विभाग ने साफ़ कर दिया है कि नियुक्ति के समय ये शिक्षक 'अप्रशिक्षित' पंचायत शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए थे और उन्हें वही वेतनमान दिया जा रहा था । इस आदेश की प्रतिलिपि राज्य के सभी संबंधित अधिकारियों और आई.टी. मैनेजर को भेज दी गई है ताकि इसे तत्काल प्रभावी बनाया जा सके