भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: दाखिल-खारिज के बदले रिश्वत लेने वाले प्रधान लिपिक को 3 साल की जेल, पटना कोर्ट ने सुनाया फैसला

विशेष निगरानी न्यायालय के न्यायाधीश श्री मो० रूस्तम ने रोहतास जिले के दिनारा अंचल कार्यालय में पदस्थापित तत्कालीन प्रभारी प्रधान लिपिक राम नरेश प्रसाद को भ्रष्टाचार का दोषी करार दिया है । न्यायालय ने उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओ

भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: दाखिल-खारिज के बदले रिश्वत लेने व

Patna - पटना से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी न्यायिक जीत की खबर सामने आई है, जहां निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा 18 साल पहले दर्ज किए गए घूसखोरी के एक मामले में दोषी को सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है । इस फैसले से सरकारी महकमे में गलत काम करने वालों के बीच कड़ा संदेश गया है।

रिश्वतखोर प्रधान लिपिक को 3 साल की जेल

पटना स्थित विशेष निगरानी न्यायालय के न्यायाधीश श्री मो० रूस्तम ने रोहतास जिले के दिनारा अंचल कार्यालय में पदस्थापित तत्कालीन प्रभारी प्रधान लिपिक राम नरेश प्रसाद को भ्रष्टाचार का दोषी करार दिया है । न्यायालय ने उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है । साथ ही, दोषी पर कुल 50,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है । जुर्माना न भरने की स्थिति में उन्हें एक महीने की अतिरिक्त साधारण जेल काटनी होगी 

दाखिल-खारिज के बदले मांगे थे 8 हजार रुपये

यह मामला साल 2008 का है, जब दिनारा के ग्राम रेही निवासी राम बहादुर सिंह ने निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी । शिकायत के अनुसार, आरोपी राम नरेश प्रसाद ने जमीन के दाखिल-खारिज (Mutation) करने के एवज में 8,000 रुपये रिश्वत की मांग की थी । सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए निगरानी ब्यूरो की टीम ने 25 सितंबर 2008 को आरोपी को घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था ।\

पुख्ता सबूतों और पैरवी ने दिलाई सफलता

भ्रष्टाचार के इस पुराने मामले में सजा दिलाने में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच और अभियोजन पक्ष की भूमिका अहम रही । तत्कालीन अनुसंधानकर्ता श्रीकांत राय ने मामले में समय पर और सटीक आरोप-पत्र दाखिल किया था । वहीं, बिहार सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक (निगरानी) अमर नाथ पाठक ने न्यायालय में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी को दोषसिद्ध कराने में कामयाबी मिली 

वर्ष 2026 में अब तक 5 मामलों में सजा

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध जारी यह अभियान लगातार सफलता प्राप्त कर रहा है । आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक कुल 5 मामलों में न्यायालय द्वारा भ्रष्ट लोक सेवकों को सजा सुनाई जा चुकी है । राम नरेश प्रसाद के अलावा, इस वर्ष वैशाली के तत्कालीन रेंजर सीताराम चौधरी, नवादा के कनीय अभियंता जयराम सिंह और कनीय विद्युत अभियंता सुदामा राय जैसे पदाधिकारियों को भी अलग-अलग मामलों में सजा मिल चुकी है 

भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी की अपील

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार मुक्त बिहार के संकल्प को दोहराते हुए जनता से अपील की है कि यदि कोई सरकारी सेवक रिश्वत की मांग करता है, तो तुरंत विभाग को सूचित करें । इसके लिए ब्यूरो ने हेल्पलाइन नंबर 0612-2215344 और व्हाट्सएप नंबर 9473494167 जारी किए हैं, जिस पर नागरिक अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं 

रिपोर्ट - अनिल कुमार