Patna Police: पटना के थानों में स्थायी तैनाती का खेल? 7 साल से एक ही थाना में तैनाती, पैरवी या प्रशासनिक मजबूरी, लंबे समय से एक ही थाने में जमे होमगार्ड जवानों पर बहस तेज

Patna Police: कुछ होमगार्ड चालक सात-सात वर्षों से एक ही थाना क्षेत्र में कार्यरत हैं। इनमें कोतवाली थाना में तैनात चालक शिवराज प्रसाद का नाम भी चर्चा में है...

Patna Police Stations Under Lens Over Home Guard Postings
पटना के थानों में स्थायी तैनाती का खेल? - फोटो : reporter

Patna Police:राजधानी पटना के कई थानों में तैनात होमगार्ड जवानों और चालकों की लंबे समय तक एक ही जगह पदस्थापना को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि कई होमगार्ड चालक स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद वर्षों से एक ही थाने में जमे हुए हैं, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और स्थानांतरण नीति की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार कुछ होमगार्ड चालक सात-सात वर्षों से एक ही थाना क्षेत्र में कार्यरत हैं। इनमें कोतवाली थाना में तैनात चालक शिवराज प्रसाद का नाम भी चर्चा में है, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि वे लंबे समय से उसी थाने में पदस्थापित हैं। आरोप यह भी है कि तबादले के आदेश जारी होने के बाद भी कई जवान और चालक प्रभाव, पहुंच और कथित पैरवी के दम पर पुराने स्थान पर ही बने हुए हैं।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सुरक्षा या कानून-व्यवस्था से जुड़े कर्मी का लंबे समय तक एक ही स्थान पर बने रहना संस्थागत निष्पक्षता के लिए चुनौती बन सकता है। सामान्यतः रोटेशन और स्थानांतरण की व्यवस्था इसलिए बनाई जाती है ताकि किसी भी प्रकार की अनुचित सांठगांठ, प्रभावशाली नेटवर्क या स्थानीय दबाव समूहों का असर कम किया जा सके।

होमगार्ड और पुलिस व्यवस्था से जुड़े जानकारों का कहना है कि नियमित अंतराल पर तैनाती बदलने से कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनी रहती है तथा जवाबदेही भी सुनिश्चित होती है। वहीं, लगातार एक ही थाने में जमे रहने को लेकर यह आशंका भी जताई जाती है कि इससे स्थानीय स्तर पर प्रभाव का दायरा बढ़ सकता है, जो प्रशासनिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं माना जाता।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों द्वारा नहीं की गई है। यदि किसी कर्मचारी के स्थानांतरण आदेश के बावजूद वह पुराने पदस्थापन स्थल पर कार्यरत है, तो इसके पीछे प्रशासनिक, कानूनी या विशेष परिस्थितियां भी हो सकती हैं। ऐसे मामलों की जांच और तथ्यात्मक पुष्टि संबंधित विभाग ही कर सकता है।

गौरतलब है कि हाल के वर्षों में बिहार पुलिस मुख्यालय और गृह विभाग ने स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने तथा प्रतिनियुक्ति और पदस्थापना व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्तर पर पक्षपात, प्रभाव या अनियमितता की गुंजाइश न रहे।

ऐसे में यदि पटना के विभिन्न थानों में होमगार्ड चालकों और जवानों के लंबे समय से जमे रहने संबंधी आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह प्रशासनिक समीक्षा और जांच का विषय बन सकता है। फिलहाल इस मुद्दे ने पुलिस और होमगार्ड महकमे की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

रिपोर्ट- रंजीत कुमार