पटना हाईकोर्ट में बिना तलाशी 'नो एंट्री' : सुरक्षा समिति का बड़ा फैसला, वकीलों और मुंशियों के लिए आईडी कार्ड हुआ अनिवार्य

पटना हाईकोर्ट की सुरक्षा समिति ने परिसर की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए वाहनों के पास और वकीलों के आईडी कार्ड को अनिवार्य कर दिया है। अब सभी को सामान की स्कैनिंग और व्यक्तिगत तलाशी की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

पटना हाईकोर्ट में बिना तलाशी 'नो एंट्री' : सुरक्षा समिति का

Patna - : राजधानी स्थित पटना हाईकोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला लिया गया है। अब हाईकोर्ट परिसर की सीमा में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को कड़ी सुरक्षा जांच और पहचान प्रक्रिया से गुजरना होगा। पिछले महीने हुई हाईकोर्ट सुरक्षा समिति की उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए इन फैसलों को अब धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली गई है। 

बिना वाहन पास के प्रवेश पर पूरी तरह रोक

नए नियमों के मुताबिक, अब हाईकोर्ट परिसर के भीतर किसी भी वाहन को तब तक प्रवेश नहीं दिया जाएगा जब तक उसके पास वैध 'कोर्ट पास' न हो। हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से जारी पासधारी वाहनों (चाहे वे दो पहिया हों या चार पहिया) को ही परिसर के अंदर जाने की अनुमति मिलेगी। यह कदम परिसर के भीतर अनधिकृत वाहनों की पार्किंग और सुरक्षा जोखिम को कम करने के लिए उठाया गया है। 

वकीलों और मुंशियों के लिए पहचान पत्र अनिवार्य

सुरक्षा समिति ने स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट परिसर में प्रवेश के लिए सभी अधिवक्ताओं और उनके क्लर्कों (मुंशी) को अपना आधिकारिक पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य होगा। बिना आईडी कार्ड के किसी को भी गेट के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हाईकोर्ट के महानिबंधक (Registrar General) की ओर से इस संबंध में तीनों अधिवक्ता संघों को औपचारिक नोटिस भेजकर सूचित कर दिया गया है। 

सामान की स्कैनिंग और तलाशी में सहयोग की अपील

जारी किए गए नोटिस में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि वकील और उनके क्लर्क सुरक्षा कर्मियों के साथ पूरा सहयोग करें। अब परिसर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति के सामान की स्कैनिंग की जाएगी और व्यक्तिगत तलाशी भी ली जाएगी। प्रशासन ने सभी से अपील की है कि वे सुरक्षा जांच के दौरान धैर्य बनाए रखें और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करें। 

सुरक्षा को लेकर क्यों लिया गया यह फैसला?

गौरतलब है कि अदालती परिसरों में बढ़ती संवेदनशीलता और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। सुरक्षा समिति का मानना है कि इन सख्त कदमों से न केवल न्यायाधीशों और वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि कोर्ट की गरिमा और शांतिपूर्ण वातावरण को भी बनाए रखने में मदद मिलेगी।