एथनॉल आवंटन में 'भेदभाव' पर पटना हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार और तेल कंपनियों से मांगा जवाब

पटना हाईकोर्ट ने बिहार की एथनॉल इकाइयों के साथ आपूर्ति आवंटन में किए जा रहे कथित भेदभाव पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और प्रमुख तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।

एथनॉल आवंटन में 'भेदभाव' पर पटना हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार

Patna - पटना हाईकोर्ट के जस्टिस ए. अभिषेक रेड्डी की एकलपीठ ने मेसर्स भारत प्लस एथनॉल व अन्य द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और संबंधित प्रतिवादियों से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता कंपनियों को वर्तमान में किया गया एथनॉल आवंटन इस याचिका पर आने वाले अंतिम निर्णय के अधीन होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सभी पक्षों को अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। 

बिहार की नौ कंपनियों ने लगाया भेदभाव का आरोप

यह कानूनी विवाद बिहार की नौ ग्रेन-आधारित (अनाज से एथनॉल बनाने वाली) कंपनियों द्वारा दायर याचिका के बाद शुरू हुआ। याचिकाकर्ताओं का सीधा आरोप है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने एथनॉल सप्लाई आवंटन में बिहार के साथ सौतेला व्यवहार किया है। जहां अन्य राज्यों के प्लांटों को उनकी क्षमता के अनुसार आवंटन मिला है, वहीं बिहार की इकाइयों को कथित तौर पर नजरअंदाज किया जा रहा है।

आवंटन में भारी अंतर: 50% बनाम 100%

याचिका में तर्क दिया गया है कि बिहार के ग्रेन-आधारित एथनॉल प्लांटों को उनकी क्षमता का केवल 50 प्रतिशत सप्लाई आवंटन दिया गया है। इसके विपरीत, गुजरात, राजस्थान, असम और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्थित प्लांटों को 100 प्रतिशत आवंटन प्रदान किया गया है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, यह असमानता न केवल व्यापारिक नियमों के विरुद्ध है, बल्कि बिहार के औद्योगिक विकास के लिए भी बड़ा झटका है।

इन प्रमुख विभागों और कंपनियों को बनाया गया प्रतिवादी

इस मामले में कानूनी कार्रवाई का दायरा काफी विस्तृत है। याचिका में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के साथ-साथ केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और बिहार सरकार को भी प्रतिवादी बनाया गया है। कोर्ट अब इन सभी संस्थानों से यह जानना चाहता है कि आवंटन की प्रक्रिया में इस तरह का अंतर क्यों रखा गया।

बंद होने की कगार पर बिहार के एथनॉल प्लांट

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित श्रीवास्तव ने कोर्ट में दलील दी कि बिहार के 11 एथनॉल प्लांट पिछले करीब चार महीनों से गंभीर उत्पादन संकट से जूझ रहे हैं। आवंटन की कमी के कारण कई इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं, जिससे करोड़ों का निवेश और हजारों नौकरियां खतरे में हैं। कोर्ट इस मामले पर अगली सुनवाई में विस्तृत दलीलों पर विचार करेगा।