आरा कोर्ट ब्लास्ट: मौत की सजा पाए लंबू शर्मा की किस्मत का फैसला अब हाईकोर्ट में; वर्चुअल पेशी का कड़ा आदेश!

पटना हाईकोर्ट ने आरा कोर्ट बम धमाके के दोषियों की अपीलों पर सुनवाई करते हुए सभी सजायाफ्ताओं की वर्चुअल पेशी और उन्हें कानूनी जानकारी देने के लिए विशेष वकील नियुक्त करने का आदेश दिया है।

आरा कोर्ट ब्लास्ट: मौत की सजा पाए लंबू शर्मा की किस्मत का फै

Patna - पटना हाईकोर्ट ने वर्ष 2015 में आरा सिविल कोर्ट परिसर में हुए भीषण बम धमाके के मामले में मृत्युदंड और उम्रकैद की सजा पाए अपराधियों की अपीलों पर सुनवाई तेज कर दी है। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ इन अपीलों पर सुनवाई कर रही है。 कोर्ट ने सजायाफ्ता अपराधियों के विधिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार और जेल प्रशासन को कई कड़े निर्देश जारी किए हैं。

सजायाफ्ता अपराधियों की वर्चुअल उपस्थिति अनिवार्य

पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि सभी सजायाफ्ता आरोपियों को अदालती कार्यवाही के दौरान ऑनलाइन उपस्थित रखा जाए。 कोर्ट ने निर्देश दिया कि विभिन्न जेलों में बंद ये अपराधी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल मोड) के माध्यम से सुनवाई में शामिल रहेंगे, ताकि वे अपनी अपीलों पर हो रही बहस को सीधे देख और सुन सकें。

DLSA की ओर से मिलेगा कानूनी सहयोग

अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जेल में बंद इन अपराधियों को कार्यवाही समझने में कोई बाधा न आए。 इसके लिए कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को निर्देश दिया है कि प्रत्येक सजायाफ्ता को एक वकील उपलब्ध कराया जाए。 यह वकील जेल में मौजूद रहकर अपराधियों को कोर्ट में हो रही सुनवाई और कानूनी बारीकियों के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे。

क्या था पूरा मामला?

  • तारीख और घटना: 23 जनवरी 2015 को आरा सिविल कोर्ट परिसर में एक महिला आत्मघाती हमलावर ने खुद को बम से उड़ा लिया था。
  • हताहत: इस आत्मघाती विस्फोट में हमलावर महिला सहित कुल तीन लोगों की मौत हुई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे。
  • साजिश: इस धमाके का मुख्य उद्देश्य पुलिस को उलझाकर कुख्यात अपराधी लंबू शर्मा को भगाना था。 विस्फोट के बाद मची अफरा-तफरी का लाभ उठाकर लंबू शर्मा अपने साथियों के साथ फरार होने में सफल रहा था。


निचली अदालत का फैसला और सजा

21 अगस्त 2019 को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्रिभुवन यादव ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था:

  • लंबू शर्मा: मुख्य आरोपी लंबू शर्मा को भारतीय दंड संहिता और विस्फोटक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मृत्युदंड की सजा सुनाई गई और 22 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया。

  • अन्य सात दोषी: चांद मियां, नईम मियां, अखिलेश उपाध्याय, रिंकू यादव, प्रमोद सिंह, श्याम विनय शर्मा और अंशु कुमार को हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा दी गई。

  • आर्थिक दंड: कोर्ट ने अखिलेश उपाध्याय पर 42 हजार रुपये और अन्य सभी पर 40-40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था。

निचली अदालत के इसी आदेश को चुनौती देते हुए दोषियों ने पटना हाईकोर्ट में अपील दायर की है, जिस पर अब चीफ जस्टिस की खंडपीठ गहन समीक्षा कर रही है。