Patna HighCourt News : जांच के बिना जब्त पदार्थ को ‘गांजा’ मान लेना कल्पना से परे, 28 साल पुराने मामले में पटना हाईकोर्ट ने की टिप्पणी, निचली अदालत के फैसले को किया रद्द

Patna HighCourt News : जांच के बिना जब्त पदार्थ को ‘गांजा’ म

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने 28 वर्ष पुराने एनडीपीएस मामलें में निर्णय सुनाते हुए तिलकधारी यादव को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि एफएसएल रिपोर्ट के बिना जब्त पदार्थ को ‘गांजा’ मान लेना “कल्पना से परे” है और वैज्ञानिक जांच के अभाव में दोषसिद्धि कायम नहीं रखी जा सकती। इसी आधार पर निचली अदालत की सजा को रद्द कर दिया गया।

जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की एकलपीठ ने तिलकधारी यादव की अपील स्वीकार करते हुए आरा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, तृतीय द्वारा 27 दिसंबर, 2010 को सुनाई गई 10 वर्ष की सजा को निरस्त कर दिया।

ये मामला शाहपुर थाना कांड संख्या-7/1998 से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, 20 जनवरी, 1998 को पुलिस ने गुप्त सूचना पर शाहपुर बाजार स्थित एक झोपड़ी में छापेमारी कर तिलकधारी यादव के पास से करीब 500 ग्राम गांजा, कुछ छोटे पैकेट और तौलने का उपकरण बरामद करने का दावा किया था। इसके आधार पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी ) के तहत मामला दर्ज कर ट्रायल चलाया गया।

हाईकोर्ट ने पाया कि जब्त पदार्थ का कोई रासायनिक परीक्षण नहीं कराया गया, जिससे यह साबित ही नहीं हो सका कि वह गांजा था। साथ ही, धारा 50 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। स्वतंत्र गवाहों के मुकरने, घटनास्थल की स्पष्ट पहचान नहीं होने और गवाहों के बयानों में विरोधाभास को भी गंभीर खामी माना गया।

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। फलस्वरूप, दोषसिद्धि और सजा को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता तिलकधारी यादव को बरी कर दिया गया।