Patna High Court: अस्पतालों के कूड़ा-कचरे पर हाईकोर्ट सख्त, बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को हलफनामे के लिए मिली एक सप्ताह की मोहलत
Patna High Court: पटना हाईकोर्ट में राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के सही ढंग से निस्तारण नहीं किए जाने के मामलेमें बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह की मोहलत दी है।
Patna High Court: पटना हाईकोर्ट में राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के सही ढंग से निस्तारण नहीं किए जाने के मामले की सुनवाई एक सप्ताह के लिए टल गई। चीफ जस्टिस वी. कामेश्वर राव की खंडपीठ ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह की मोहलत दी है। अब मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी।
पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि लगभग सभी जिलों में बायोमेडिकल वेस्ट से संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद कोर्ट ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अस्पतालों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
अदालत ने पिछली सुनवाई में राज्य के विभिन्न जिलों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। याचिकाकर्ता विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा की ओर से कोर्ट को बताया गया कि आदेश के बाद केवल दस जिलों से इस संबंध में रिपोर्ट प्राप्त हुई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा अदालत के समक्ष रखा था, लेकिन औपचारिक हलफनामा दाखिल नहीं किया गया था।
इसके बाद कोर्ट ने शेष जिलों और बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्धारित अवधि में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। अदालत ने जिलाधिकारियों से भी अपने-अपने जिलों में अस्पतालों और नर्सिंग होम के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा था। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से यह बताने को कहा गया था कि नियमों का उल्लंघन करने वाले कितने अस्पतालों को नोटिस दिया गया और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि बिहार में कई छोटे-बड़े अस्पताल और नर्सिंग होम बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण से जुड़े नियमों का कथित तौर पर उल्लंघन कर रहे हैं। उनका कहना है कि अस्पतालों का कूड़ा-कचरा मनमाने तरीके से इधर-उधर फेंके जाने से बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैल सकता है और इसका आम लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
अब निगाहें बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के हलफनामे पर टिकी हैं। अगली सुनवाई में अदालत के सामने यह स्पष्ट हो सकेगा कि राज्य के अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर अब तक कितनी कार्रवाई हुई और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर क्या कदम उठाए गए।