जिंदगी की जंग में कुदरत का करिश्मा, पटना के जीपीओ ओवरब्रिज पर मौत को मात दे गए मुसाफिर!काल के गाल से सलामत वापसी

Patna Accident:राजधानी की बरसाती और सुनसान रात में एक ऑटो पर सवार होकर कुछ लोग अपनी मंजिल की ओर जा रहे थे। तभी अचानक, एक बेक़ाबू वाहन ने टेंपो को ज़ोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि जाको राखे साइयां वाली कहावत सच साबित होने का वक्त आ गया।...

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पटना में जिंदगी की जंग में कुदरत का करिश्मा- फोटो : reporter

Patna Accident: अंधेरी रात, वीरान सड़कें और घड़ी की सुई जब रात के ठीक 1:00 बजा रही थी, तब बिहार की राजधानी पटना के जीपीओ गोलंबर के पास एक ऐसा अजब-गजब और रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर देखने को मिला, जिसे देखकर हर किसी की रूह कांप उठी। यह वाकया इस पुरानी कहावत पर मुहर लगा गया कि "जाको राखे साइयां, मार सके न कोय।"

क्या था पूरा माज़रा?

मिली जानकारी और चश्मदीदों की बयानी के मुताबिक, राजधानी की बरसाती और सुनसान रात में एक ऑऑटो पर सवार होकर कुछ मुसाफिर अपनी मंजिल की ओर जा रहे थे। तभी अचानक, एक बेक़ाबू और अज्ञात वाहन ने  टेंपो को ज़ोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि जाको राखे साइयां वाली कहावत सच साबित होने का वक्त आ गया।

टेंपो पर सवार तीन खुशनसीब मुसाफिर संतुलन खो बैठे और सीधे जीपीओ ओवरब्रिज की ऊँचाई से नीचे मुख्य सड़क की तर हवा में गोता लगाते हुए आ गिरे।

मौत के मुँह से सलामती की वापसी

आसपास मौजूद चश्मदीद इस भयानक हादसे को देखकर हक्के-बक्के रह गए। किसी के मुँह से एक लफ़्ज नहीं निकल रहा था। हर शख्स यही मान बैठा था कि अब इन तीनों की जिंदगी का सर यहीं तमाम हो चुका है। इतनी बुलंदी से नीचे गिरना यानी मौत को सीधे दावत देना था।

लेकिन, कुदरत का करिश्मा और ऊपर वाले की मर्जी कुछ और ही थी। जब लोग डरते-सहमे घटनास्थल पर पहुँचे, तो जो नज़ारा सामने आया, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। चमत्कार यह था कि मौत को बहुत करीब से छूकर गुजरने वाले वे तीनों मुसाफिर जिंदा थे!

हाँ, इस खौफनाक हादसे में उनकी किस्मत ने उनका साथ ज़रूर दिया। किसी का पैर टूट गया, तो किसी के जिस्म पर थोड़ी-बहुत चोटें और खरोंचें आईं, लेकिन उन तीनों की साँसें अभी भी सुरक्षित चल रही थीं।

प्रत्यक्षदर्शियों का अफ़साना

मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि यह महज़ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि सीधे-सीधे ईश्वर की कृपा का नमूना था। ब्रिज के ऊपर से नीचे गिरने के बाद भी अगर कोई सिर्फ मामूली चोटों और टूटे हुए पाँव के साथ बच जाए, तो इसे जिंदगी की जंग जीतना ही कहा जाएगा।

यह अजीब-ओ-ग़रीब हादसा पटना के इतिहास में एक ऐसा वाकया बन गया है, जो यह साबित करता है कि जब ऊपर वाले की मेहरबानी हो, तो बड़े से बड़ा तूफान भी इंसान का बाल बांका नहीं कर सकता।

रंजीत  कुमार की रिपोर्ट