500 से अधिक लोगों से 10 करोड़ की ठगी! पटना में फर्जी मेडिकल और पासपोर्ट से विदेश भेजने वाले रैकेट का भंडाफोड़

गांधी मैदान थाना पुलिस ने एग्जिबिशन रोड स्थित चांदी व्यापार भवन के पांचवें माले पर संचालित 'वैशाली ट्रैवल्स' के दफ्तर में छापेमारी कर 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।118 पासपोर्ट, फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र, मेडिकल पर्चियां, लैपटॉप, नकद ₹1.44 लाख जब्त

Patna Fake Passport Racket busted
पटना में फर्जी पासपोर्ट और जाली डाक्यूमेंट्स से विदेश भेजने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश- फोटो : Reporter

पटना की गांधी मैदान थाना पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोगों को खाड़ी देशों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने शुक्रवार को गुप्त सूचना के आधार पर एग्जिबिशन रोड स्थित चांदी व्यापार भवन की पांचवीं मंजिल पर संचालित 'वैशाली ट्रैवल्स कंसल्टेंसी सर्विस' के कार्यालय पर छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने मौके से गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।


फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र, मेडिकल रिपोर्ट और 118 पासपोर्ट बरामद

छापेमारी के दौरान पुलिस को कार्यालय से बिहार और असम समेत देश के विभिन्न राज्यों के नागरिकों के 118 असली और फर्जी पासपोर्ट बरामद हुए हैं। इसके साथ ही विभिन्न संस्थाओं के जाली अनुभव प्रमाणपत्र (Experience Certificates), पैथोलॉजी लैब की फर्जी मेडिकल जांच रिपोर्ट, फर्जी इंटरव्यू लेटर, पैथोलॉजी पर्चियों की बुकलेट और भारी मात्रा में अन्य संदिग्ध कागजात जब्त किए गए हैं।


इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, नकद और विदेशी मुद्रा जब्त

पुलिस ने मौके से 3 लैपटॉप, 1 सीपीयू, 5 मोबाइल फोन और 1.44 लाख रुपये भारतीय नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा दफ्तर से विदेशी मुद्रा भी मिली है, जिसमें दुबई की 210 दिरहम, ओमान की 7 रियाल और सऊदी अरब की 1000 रियाल शामिल हैं। गिरफ्तार अभियुक्तों में महनार (वैशाली) निवासी तनवीर आलम, मखदुमपुर (जहानाबाद) निवासी शाहिद अनवर और गर्दनीबाग (पटना) निवासी तौसीफ आलम शामिल हैं।


नौकरी के नाम पर प्रति व्यक्ति 2 से 3 लाख रुपये की वसूली

प्रारंभिक पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि यह गिरोह खाड़ी देशों में फिटर, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर और तकनीशियन जैसी नौकरियां दिलाने का झांसा देता था। इसके एवज में प्रति व्यक्ति से 2 से 3 लाख रुपये तक वसूले जाते थे, जबकि पासपोर्ट व अन्य जाली दस्तावेज तैयार कराने का खर्च अलग से लिया जाता था। आरोपी खुद ही फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों को विदेश भेजने की प्रक्रिया पूरी करते थे।


500 से अधिक लोगों को भेजा विदेश, 10 करोड़ से ज्यादा की ठगी का अंदेशा

जांच में अब तक मिली जानकारी के अनुसार, यह गिरोह पूर्व में 500 से अधिक लोगों को फर्जी कागजातों के आधार पर विदेश भेज चुका है। पुलिस का अनुमान है कि इस अवैध नेटवर्क के जरिए आरोपियों ने करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक की मोटी कमाई की है। बरामद सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और पासपोर्ट की गहन तकनीकी जांच की जा रही है।


नेटवर्क के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज की जांच तेज

गांधी मैदान थाना पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अब इस बात की पड़ताल में जुटी है कि गिरोह के तार और कहां-कहां जुड़े हैं। इस बात की भी जांच की जा रही है कि फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और जाली पासपोर्ट किस प्रेस या एजेंट के माध्यम से तैयार कराए जाते थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के आगे बढ़ने पर इस सिंडिकेट से जुड़े कई अन्य बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।

पटना से अनिल की रिपोर्ट