Bihar News : बिहार में 1.14 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों पर होगी पैनी नजर, 'पोषण ट्रैकर कमांड सेंटर' की होगी स्थापना

Bihar News : समाज कल्याण विभाग अब मुख्यालय स्तर पर एक अत्याधुनिक 'पोषण ट्रैकर कमांड सेंटर' स्थापित करने जा रहा है। जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों पर पैनी नजर रखी जाएगी......पढ़िए आगे

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आंगनबाड़ी केंद्रों पर पैनी नजर- फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : राज्य में संचालित 1 लाख 14 हजार 718 आंगनबाड़ी केंद्रों पर होने वाली दैनिक गतिविधियों और बच्चों के विकास की निगरानी को अब और अधिक सशक्त तथा पारदर्शी बनाने की तैयारी चल रही है। समाज कल्याण विभाग अब मुख्यालय स्तर पर एक अत्याधुनिक 'पोषण ट्रैकर कमांड सेंटर' स्थापित करने जा रहा है। इस विशेष कमांड सेंटर के माध्यम से राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की हर छोटी-बड़ी गतिविधि की ऑन-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे व्यवस्था में सुधार होगा।

यह पूरी व्यवस्था एक केंद्र प्रायोजित मिशन के तहत राज्य में प्रभावी रूप से लागू की जा रही है। इस डिजिटल पहल के पूरी तरह शुरू होने के बाद, छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की पोषण स्थिति, उनका वजन, ऊंचाई और समग्र शारीरिक विकास से संबंधित सभी महत्वपूर्ण रिपोर्टें पोषण ट्रैकर कमांड सेंटर के सार्वजनिक डैशबोर्ड पर उपलब्ध करा दी जाएंगी। इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि आम नागरिक भी इन आंकड़ों को आसानी से ऑनलाइन देख सकेंगे।

विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने हाल ही में आंगनबाड़ी केंद्रों की सभी गतिविधियों की डिजिटल निगरानी के लिए 'पोषण ट्रैकर ऐप' लॉन्च किया है। इसी ऐप के जरिए अब राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक बेहद प्रभावी और जवाबदेह मॉनिटरिंग व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इस ऐप के माध्यम से डेटा प्रविष्टि और रिपोर्टिंग का काम बेहद सुगम हो जाएगा।

तकनीकी रूप से केंद्रों को मजबूत करने के लिए अब सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को विशेष 'ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस' से भी लैस कर दिया गया है। इन आधुनिक उपकरणों की मदद से शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों के शारीरिक विकास और उनकी पोषण स्थिति को बिल्कुल सटीक रूप से मापा जा सकेगा। इसके बाद संबंधित रिपोर्ट और आंकड़ों को पोषण ट्रैकर के सार्वजनिक डैशबोर्ड पर अनिवार्य रूप से अपलोड करना होगा।

इस नई तकनीकी व्यवस्था के लागू होने से आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि बच्चों को मिलने वाले पोषाहार और अन्य सुविधाओं में होने वाली गड़बड़ियों पर भी पूरी तरह से लगाम लगाई जा सकेगी। मुख्यालय स्तर पर बैठने वाले अधिकारी एक क्लिक के जरिए किसी भी केंद्र की वास्तविक स्थिति का पता लगा सकेंगे, जिससे बच्चों के कुपोषण मुक्त भविष्य के संकल्प को मजबूती मिलेगी।