Bihar Politics: नीतीश कुमार की नई यात्रा का रोडमैप तैयार, जानें अब तक की 16 यात्राओं का इतिहास

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर जनता के बीच जा रहे हैं। बिना सीएम पद के यह उनकी पहली बड़ी राजनीतिक यात्रा होगी। जानें क्या है जदयू का रोडमैप और नीतीश की अब तक की 16 यात्राओं का पूरा रिकॉर्ड

Nitish Kumar Bihar Yatra 2026 Roadmap
नीतीश कुमार की नई यात्रा का रोडमैप तैयार- फोटो : news 4 nation

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार एक बार फिर राज्यव्यापी यात्रा पर निकलने की तैयारी कर रहे हैं। सोमवार को पटना स्थित 'एक अणे मार्ग' पर आयोजित जदयू विधानमंडल दल की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने बताया कि नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से विधानमंडल दल का नेता चुना गया है और वे जल्द ही जनता से सीधा संवाद करने के लिए सड़क पर उतरेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य लोगों की राय जानना और भविष्य की राजनीति के लिए पार्टी की दिशा तय करना है।


पहली बार 'पूर्व मुख्यमंत्री' के रूप में दौरा

नीतीश कुमार के राजनीतिक करियर में यह पहला मौका होगा जब वे मुख्यमंत्री के पद पर न रहते हुए बिहार की यात्रा करेंगे। अब तक की उनकी सभी यात्राएँ सरकारी तंत्र और मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र के साथ हुई हैं, लेकिन इस बार वे पूरी तरह से एक राजनीतिक नेता के तौर पर जनता के बीच जाएंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसके लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया जा रहा है, जिसमें ग्रामीण इलाकों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से जुड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


2005 से 2026 तक का यात्रा इतिहास

नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन में अब तक 16 यात्राएं की हैं। इसकी शुरुआत जुलाई 2005 में 'न्याय यात्रा' से हुई थी। समय-समय पर उन्होंने 'विकास यात्रा' (2009), 'सेवा यात्रा' (2011), 'अधिकार यात्रा' (2012) और हाल के वर्षों में 'समाधान यात्रा' (2023) व 'समृद्धि यात्रा' (2026) के जरिए बिहार के हर जिले का दौरा किया है। उनकी यात्राओं का रिकॉर्ड रहा है कि वे चुनाव से पहले या किसी बड़े राजनीतिक बदलाव के बाद जनता का मिजाज भांपने के लिए मैदान में उतरते रहे हैं।


आगामी रोडमैप और सियासी मायने

इस नई यात्रा के शेड्यूल और नाम की घोषणा जल्द ही की जाएगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के जरिए नीतीश कुमार एक बार फिर अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को मजबूत करना चाहते हैं और यह संदेश देना चाहते हैं कि पद पर रहें या न रहें, बिहार की राजनीति के केंद्र में आज भी वही हैं। विपक्षी दलों की सक्रियता के बीच नीतीश कुमार का यह दौरा बिहार की सियासी बिसात पर एक बड़ा दांव माना जा रहा है।