नीतीश युग खत्म? बिहार में सत्ता परिवर्तन की उलटी गिनती शुरू, लोकभवन या गांधी मैदान? कहां लेंगे नए CM शपथ, अंदर की खबर

Bihar Politics: बिहार की सियासत इस वक्त एक बड़े क्रांति के मुहाने पर खड़ी है, जहां अगले 48 घंटे सूबे की हुकूमत का नक्शा बदल सकते हैं।

Bihar CM oath venue suspense
बिहार का अगला CM कहां लेगा शपथ?- फोटो : reporter

Bihar Politics: बिहार की सियासत इस वक्त एक बड़े क्रांति के मुहाने पर खड़ी है, जहां अगले 48 घंटे सूबे की हुकूमत का नक्शा बदल सकते हैं। सत्ता के गलियारों में यह बात लगभग तय मानी जा रही है कि अब नीतीश कुमार के बाद बिहार का नया मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी से होगा। यह पहली दफा होगा जब बीजेपी अपने दम पर बिहार में ताज हासिल करती नजर आएगी, जिससे सियासी फिजा में गर्मी और भी बढ़ गई है।

हालांकि सरताज कौन होगा, इस पर अभी पर्दा बरकरार है, लेकिन अवाम के बीच जबरदस्त जिज्ञासा है। हर गली, नुक्कड़ और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बस एक ही सवाल कौन बनेगा बिहार का नया सियासी बादशाह? इसी के साथ शपथ ग्रहण के मंच को लेकर भी कयासों का बाजार गर्म है।

सूत्रों की मानें तो 15 अप्रैल को लोकभवन में शपथ ग्रहण का भव्य आयोजन हो सकता है। सोमवार को यहां तैयारियों की हलचल भी देखी गई, जहां जिला प्रशासन के आला अफसरों की आवाजाही तेज रही। कहा जा रहा है कि डीएम एस.एम. त्यागराजन ने राज्यपाल सैयद अता हसनैन से मुलाकात कर पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा पर मंथन किया।

दूसरी तरफ बापू सभागार को भी बैकअप के तौर पर खाली रखा गया है, जबकि कुछ दिन पहले तक गांधी मैदान का नाम भी चर्चा में था। हालांकि, आधिकारिक ऐलान अब भी बाकी है, जिससे सस्पेंस और गहराता जा रहा है।

सियासी जोड़-तोड़ के इस दौर में पटना में मुलाकातों का सिलसिला तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, वरिष्ठ नेता विजेंद्र यादव और संजय झा की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकातों ने अटकलों को और हवा दे दी है। अंदरखाने सब कुछ कंट्रोल में बताया जा रहा है और सत्ता परिवर्तन को स्मूथ ट्रांजिशन का नाम दिया जा रहा है।

14 अप्रैल को बुलाई गई कैबिनेट बैठक को नीतीश सरकार की आखिरी दस्तक माना जा रहा है। इसके बाद नीतीश कुमार राज्यपाल को इस्तीफा सौंप सकते हैं, जिससे बिहार की सियासत में एक नए दौर का आगाज होगा। अब निगाहें टिकी हैं एनडीए विधायक दल की बैठक पर, जहां तख्त के नए हकदार के नाम पर आखिरी मुहर लगेगी। बिहार बस कुछ घंटों की दूरी पर है एक नए सियासी इतिहास से।