Bihar Politics: एनडीए के रणनीतिक प्रहार के आगे ध्वस्त हुआ महागठबंधन, राज्यसभा समर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की कूटनीतिक विजय से राजद हैरान-परेशान

एनडीए की शतरंजी चालों के समक्ष राजद की रणनीति निष्प्रभावी सिद्ध हुई। लालू यादव ने राजनीतिक घात को कूटनीति में परिवर्तित कर सत्ता के शिखर तक यात्रा की, वहीं तेजस्वी एक साधारण चुनाव प्रबंधन में भी रणनीतिक पराजय का सामना करते प्रतीत हुए।...

NDA Outmaneuvers Mahagathbandhan in Rajya Sabha Battle
एनडीए के रणनीतिक प्रहार के आगे ध्वस्त हुआ महागठबंधन- फोटो : reporter

Bihar Politics: बिहार की समकालीन राजनीति में राज्यसभा चुनाव ने ऐसा अप्रत्याशित मोड़ लिया, जिसने महागठबंधन की रणनीतिक संरचना को ध्वस्त कर दिया। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने सूक्ष्म कूटनीति एवं गूढ़ राजनीतिक कौशल का परिचय देते हुए राष्ट्रीय जनता दल की दृष्टि के समक्ष ही विजय की बाजी हस्तगत कर ली, और विपक्ष को इसका आभास तब हुआ जब परिणाम उनके नियंत्रण से परे हो चुके थे।

कथित तौर पर  तेजस्वी यादव अभी तक उस कूटनीतिक प्रखरता को आत्मसात नहीं कर सके हैं, जिसके लिए लालू यादव विख्यात रहे हैं। जहाँ लालू यादव ने राजनीतिक घात को कूटनीति में परिवर्तित कर सत्ता के शिखर तक यात्रा की, वहीं तेजस्वी एक साधारण चुनाव प्रबंधन में भी रणनीतिक पराजय का सामना करते प्रतीत हुए।

राजनीतिक दृष्टांत के रूप में प्रचलित कहावत गाछे कटहर, ओठे तेल यहाँ पूर्णतः सार्थक सिद्ध हुई। चुनाव परिणाम घोषित होने से पूर्व ही विजय का उद्घोष, राजनीतिक अपरिपक्वता का द्योतक बना। एआईएमआईएम के समर्थन प्राप्त होते ही राजद द्वारा विजय का आश्वासन देना, अंततः आत्मघाती सिद्ध हुआ। यह वही प्रवृत्ति है, जो बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के समय भी परिलक्षित हुई थी, जब परिणामों से पूर्व ही शपथ-ग्रहण की तिथि घोषित कर दी गई थी।

विशेष रूप से फैसल रहमान का रुख परिवर्तन, राजद की आंतरिक संरचना पर गंभीर प्रश्नचिह्न स्थापित करता है। स्वयं को अल्पसंख्यक वर्ग का प्रमुख प्रतिनिधि घोषित करने वाली नेतृत्व-शैली के समक्ष यह विचलन, राजनीतिक विश्वसनीयता के संकट को उजागर करता है।

इसके अतिरिक्त भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विधायकों की अनुपस्थिति ने भी समीकरण को प्रतिकूल दिशा में मोड़ दिया। यह परिघटना इस तथ्य को रेखांकित करती है कि वर्तमान राजनीति में निष्ठा एवं सिद्धांत गौण होते जा रहे हैं, जबकि सत्ता-प्राप्ति की आकांक्षा सर्वोपरि बन चुकी है।

बहरहाल  यह कहा जा सकता है कि एनडीए की शतरंजी चालों के समक्ष राजद की रणनीति निष्प्रभावी सिद्ध हुई। तेजस्वी यादव चाहे पराजय के विविध कारण प्रस्तुत करें, तथापि यथार्थ यह है कि वे इस समर में प्रतिद्वंद्वी की कूटनीतिक चालों का पूर्वानुमान करने में पूर्णतः असफल रहे और यही उनकी पराजय का प्रमुख कारण बना।