Anant Singh:सलाखों के पीछे अनंत सिंह को मिलेगी कानूनी राहत! इस पेंच में फंसी छोटे सरकार की आजादी, सलाखों के पीछे से सत्ता की धमक, मोकामा के माननीय का इंतज़ार

Anant Singh: बिहार की सियासत में ‘छोटी सरकार’ के नाम से मशहूर बाहुबली नेता अनंत सिंह एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं।

Mokama MLA Anant Singh Behind Bars
सलाखों के पीछे अनंत सिंह को मिलेगी कानूनी राहत!- फोटो : social Media

Anant Singh: बिहार की सियासत में ‘छोटी सरकार’ के नाम से मशहूर बाहुबली नेता अनंत सिंह एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। जेल से उनकी रिहाई को लेकर कयासों का बाज़ार गर्म है। हाल ही में एक मामले में मिली राहत ने समर्थकों के बीच जश्न का माहौल तो बना दिया, लेकिन कानून की किताबों में तस्वीर अब भी धुंधली है। सवाल सीधा है क्या अनंत सिंह वाकई जेल की सलाखों से बाहर आ पाएंगे, या यह राहत महज़ सियासी तसल्ली भर है?

कानूनी जानकारों की मानें तो अनंत सिंह की राह अभी आसान नहीं है। भले ही एक केस में उन्हें राहत मिली हो, लेकिन रिहाई की मंज़िल तक पहुंचने के लिए कई स्पीड ब्रेकर पार करने होंगे। हत्या, रंगदारी और आर्म्स एक्ट जैसे संगीन मामलों में वे अब भी न्यायिक हिरासत में हैं। कानून साफ कहता है कि रिहाई तभी मुमकिन है, जब उन सभी मामलों में उन्हें जमानत या बरी किया जाए, जिनमें वे फिलहाल बंद हैं।

इतना ही नहीं, कानूनी विशेषज्ञ यह भी आगाह कर रहे हैं कि अगर किसी भी मामले में उन्हें दो साल या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो उनकी विधायकी पर भी खतरे के बादल मंडरा सकते हैं। यानी मामला सिर्फ जेल से बाहर आने का नहीं, बल्कि सियासी वजूद बचाने का भी है।

अनंत सिंह चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन अब तक विधानसभा की शपथ नहीं ले पाए हैं। इस पर भी कानून अपनी शर्तें रखता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, निर्वाचित सदस्य को यथाशीघ्र शपथ लेनी चाहिए। हालांकि, जेल में बंद सदस्य अदालत से विशेष अनुमति लेकर शपथ ग्रहण के लिए आ सकता है। बड़ा सवाल यह है क्या कोई विधायक पांच साल तक बिना शपथ लिए रह सकता है?

संविधान के अनुच्छेद 190(4) के अनुसार, यदि कोई सदस्य बिना अनुमति 60 दिनों तक सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सीट रिक्त हो सकती है। लेकिन अगर सदन उनकी अनुपस्थिति को स्वीकार कर ले, तो तकनीकी तौर पर वे पद पर बने रह सकते हैं। हालांकि, बिना शपथ लिए वे न सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकते हैं, न ही वोटिंग कर सकते हैं।

फिलहाल, सबकी निगाहें अदालत के अगले फैसले पर टिकी हैं। अगर अन्य मामलों में भी जमानत मिलती है, तो अनंत सिंह विधानसभा की देहरी लांघ सकते हैं। वरना बिहार की राजनीति एक ऐसे अनोखे अध्याय की गवाह बनेगी, जहां ‘छोटी सरकार’ सलाखों के पीछे रहकर ही अपना सियासी सफ़र पूरा करती दिखेगी।