शहीदों के सम्मान में खाली रहीं कुर्सियां, क्या बाहुबली के 'क्रेज' के आगे फीकी पड़ गई शहादत की याद?

बाढ़ में शहीदों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में जनता की अनुपस्थिति और खाली कुर्सियों ने प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चेयरमैन ने सूचना न देने का लगाया आरोप।

शहीदों के सम्मान में खाली रहीं कुर्सियां, क्या बाहुबली के 'क

Badh/Patna - :  बिहार की राजनीति में 'छोटे सरकार' के नाम से मशहूर बाहुबली अनंत सिंह जब सड़कों पर निकलते हैं, तो उनके काफिले में शामिल 200 से अधिक गाड़ियां और उमड़ती हजारों की भीड़ क्षेत्र में उनके दबदबे की गवाही देती है। लेकिन इसके ठीक उलट, बुधवार को बाढ़ अनुमंडल प्रशासन द्वारा आयोजित 'एक शाम शहीदों के नाम' कार्यक्रम में जनता की गैर-मौजूदगी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहीदों की याद में सजे सबेरा सिनेमा हॉल की खाली कुर्सियां यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या समाज में शहीदों से ज्यादा बाहुबल का क्रेज बढ़ गया है?

लाखों का खर्च और बाहरी कलाकार भी नहीं खींच पाए भीड़

अनुमंडल प्रशासन ने इस कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया। बाहर से बड़े कलाकारों को बुलाया गया और व्यवस्था के लिए नोडल पदाधिकारी तैनात किए गए। लेकिन आयोजन के समय हॉल में सन्नाटा पसरा रहा। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि जिस क्षेत्र में एक बाहुबली नेता की झलक पाने के लिए सैकड़ों गाड़ियों का काफिला स्वतः स्फूर्त जुट जाता है, वहां देश के लिए जान देने वाले शहीदों के कार्यक्रम में प्रशासन मुट्ठी भर लोगों को भी नहीं जुटा पाया।

जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता

इस 'फ्लॉप' शो का एक बड़ा कारण प्रशासन का अड़ियल रवैया भी माना जा रहा है। बाढ़ नगर परिषद के चेयरमैन संजय कुमार उर्फ 'गायमाता' ने आरोप लगाया कि उन्हें इस कार्यक्रम की सूचना तक नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि जब नगर के प्रथम नागरिक को ही निमंत्रण नहीं मिला, तो आम जनता को कैसे पता चलता? यह प्रशासन की शहीदों के प्रति घोर उदासीनता और प्रचार-प्रसार की कमी को दर्शाता है।

शहादत पर भारी पड़ता 'दबदबा'

बाढ़ की सड़कों पर अक्सर दिखने वाला वह दृश्य, जिसमें अनंत सिंह के समर्थन में गाड़ियों का रेला चलता है, प्रशासन के इस आयोजन के बिल्कुल विपरीत था। एक ओर जहां बाहुबली के लिए भारी भीड़ उमड़ती है, वहीं शहीदों के लिए आयोजित शाम महज 'खानापूर्ति' बनकर रह गई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन ने बिना किसी जमीनी तैयारी और जनसंवाद के लाखों रुपए बर्बाद कर दिए, जिससे शहीदों का सम्मान बढ़ने के बजाय आयोजन का उपहास ज्यादा हुआ।

रिपोर्ट - रवि शंकर