भूमि विवादों में अब नहीं लगाने पड़ेंगे दफ्तर के चक्कर, अधिकारियों को सख्त चेतावनी, ये प्राथमिकता नहीं मानी तो होगी कार्रवाई
Bihar News: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने साफ लहज़े में ऐलान किया है कि अब लोगों के जमीन से जुड़े मामलों में देरी या लापरवाही किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
Bihar News: बिहार की सियासत में जमीन से जुड़े मसले हमेशा से अहम रहे हैं, और अब इस पर हुकूमत ने एक नया सख़्त रुख अख़्तियार कर लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने साफ लहज़े में ऐलान किया है कि अब लोगों के जमीन से जुड़े मामलों में देरी या लापरवाही किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रधान सचिव चंद्रकांत कुमार अनिल इस संबंध में सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों, अपर समाहर्ताओं, भूमि सुधार उप समाहर्ताओं तथा अंचल अधिकारियों को पत्र जारी किया है। वहीं उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दो टूक अंदाज़ में कह दिया है कि अगर किसी भी स्तर पर इन हिदायतों की अनदेखी हुई, तो जवाबदेही तय होगी और कार्रवाई भी लाज़िमी होगी।सरकार ने खास तौर पर समाज के कमजोर तबकों को राहत देने का संदेश दिया है। अनुसूचित जाति-जनजाति, विधवा, महिला , फौज में तैनात या रिटायर्ड जवान, बाहर ड्यूटी कर रहे सुरक्षाकर्मी और केंद्र सरकार के मुलाज़िम इन सभी के मामलों को फ़ौरी तौर पर निपटाना अब प्रशासन की ज़िम्मेदारी होगी।
दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा वक़्त में लागू फ़र्स्ट इन फ़र्स्ट आउट (FIFO) सिस्टम को 30 जून 2026 तक मुअत्तल कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि अब सिर्फ़ पुरानी तारीख़ नहीं, बल्कि इंसाफ़ और ज़रूरत के आधार पर फैसले लिए जाएंगे।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी ताकीद की है कि आवेदकों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पर मजबूर न किया जाए। ज़रूरत पड़ने पर उन्हें निजी हाज़िरी से छूट देकर उनके वकील या नुमाइंदे के ज़रिये सुनवाई की सहूलत दी जाए ताकि निज़ाम ज़्यादा इंसानी, पारदर्शी और जवाबदेह बन सके। दरअसल, ईज ऑफ लिविंग के एजेंडे के तहत हुकूमत चाहती है कि आवाम को राहत मिले और उनकी शिकायतों का हल फौरन निकले। लेकिन हाल ही में सारण और मुंगेर के जन संवादों में यह सामने आया कि कई जगहों पर हिदायतों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
अब देखना यह होगा कि सरकार का यह सख़्त पैग़ाम जमीनी हकीकत में कितना असरदार साबित होता है या फिर यह भी महज़ एक सियासी बयान बनकर रह जाएगा।