Bihar News : न्यूज़4नेशन के प्रधान संपादक कौशलेन्द्र प्रियदर्शी ने पिता की पुण्यतिथि पर दी भावभीनी श्रद्धांजलि, यादों को किया साझा

Bihar News : न्यूज़4नेशन के प्रधान संपादक कौशलेन्द्र प्रियदर्शी ने पिता की आज 14 वीं पुण्यतिथि है. इस मौके पर कई नेताओं, समाजसेवियों और गणमान्य लोगों ने अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.....पढ़िए आगे

Bihar News : न्यूज़4नेशन के प्रधान संपादक कौशलेन्द्र प्रियदर
पिता को भावभीनी श्रद्धांजलि - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : न्यूज़4नेशन के प्रधान संपादक कौशलेन्द्र प्रियदर्शी के पूज्य पिता की आज पुण्यतिथि है। इस भावुक अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, प्रमुख समाजसेवियों और समाज के गणमान्य लोगों ने उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने उनके व्यक्तित्व को याद करते हुए समाज के प्रति उनके योगदान की सराहना की और संपादक कौशलेन्द्र प्रियदर्शी के साथ अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

संस्कारों की थाती को बताया जीवन का आधार

अपने पिता को याद करते हुए कौशलेन्द्र प्रियदर्शी ने अत्यंत भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा, "आज ही के दिन आपने अपने नश्वर शरीर का परित्याग किया था, लेकिन आपके द्वारा दिए गए संस्कार और व्यवहार की थाती आज भी मेरे जीवन का आधार है। उन्हीं के सहारे मैं अपने कर्तव्य पथ पर निरंतर अग्रसर हूँ।" उन्होंने अपने पिता के सरल और विनम्र स्वभाव को याद करते हुए कहा कि अभावों में भी मुस्कुराते हुए जीवन जीना उन्होंने पिता से ही सीखा है।

अद्भुत था मुश्किलों को सुलझाने का तरीका

कौशलेन्द्र प्रियदर्शी ने पिता के गुणों का वर्णन करते हुए बताया कि उनके पिता में विपरीत परिस्थितियों में भी बिना क्रोध किए, मधुर स्वभाव से हर मुश्किल काम को चुटकी में निपटा देने की अद्भुत कला थी। वे निंदा से कोसों दूर रहते थे और हमेशा इस बात का ध्यान रखते थे कि उनसे कोई नाराज न हो। परिवार के हर सदस्य का माकूल ख्याल रखना उनकी प्राथमिकता थी और उन्हीं के पदचिह्नों पर चलते हुए आज वे जीवन की निरंतरता बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।

विदेह की तरह निष्काम कर्म का उदाहरण

पिता को अपना 'रोल मॉडल' और 'हीरो' बताते हुए उन्होंने कहा कि शारीरिक रूप से मौजूद न होने के बावजूद पिता का वजूद हमेशा उन्हें महसूस होता है। उन्होंने कहा, "काम, क्रोध, मद और मोह से मुक्त होकर एक विदेह की तरह जीकर आपने सिखाया कि गृहस्थ जीवन में भी बिना छल-कपट के कैसे जिया जा सकता है। ईश्वरीय गुणों से परिपूर्ण आपका जीवन एक पाठशाला की तरह है, जहाँ मैं आज भी एक छात्र की तरह सीखने की कोशिश कर रहा हूँ।"

गलतियों को माफ करने का अकल्पनीय अंदाज

उन्होंने अपने बचपन की यादों को साझा करते हुए बताया कि उनके पिता का गलतियां होने पर मुस्कुरा कर माफ करने और दंड देने का तरीका भी अकल्पनीय था। अंत में उन्होंने कहा कि पिता की अनगिनत यादों को कलेजे में समेटे, वे भी उन्हीं की तरह एक आदर्श पिता और अभिभावक बनने का प्रयास कर रहे हैं। वहीँ कौशलेन्द्र प्रियदर्शी के बड़े भाई अमरेन्द्र प्रियदर्शी ने कहा की बाबूजी आज ही के दिन पन्द्रह वर्ष पूर्व इस नश्वर संसार को छोड़कर पुण्य लोक के लिए प्रस्थान कर गए थे। लेकिन आज भी उनका  आशीर्वाद पुरे परिवार को मिलते रहता है, जो हम सबको जीवन जीने का आधार बना रहता है।