हर खेत तक पहुंचेगा सिंचाई का पानी, बिहार सरकार ने 'सात निश्चय-3' के तहत योजना को 2030 तक बढ़ाया : डॉ. संतोष कुमार सुमन
लघु जल संसाधन मंत्री ने बड़ा एलान किया है। उन्होंने कहा है कि बिहार के किसानों को अब सुखाड़ का सामना नहीं करना पड़ेगा। हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचेगा....
Patna : बिहार में सुखाड़ की स्थिति में भी हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाने के संकल्प के साथ लघु जल संसाधन विभाग ने अपनी कमर कस ली है। विकास भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए बिहार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने विभाग की हालिया बड़ी उपलब्धियों और भविष्य के रोडमैप को मीडिया के सामने रखा। उन्होंने एलान किया कि 'हर खेत तक सिंचाई का पानी' कार्यक्रम के बेहतरीन और सकारात्मक परिणामों को देखते हुए राज्य सरकार ने इसे 'सात निश्चय-3' के तहत अब वर्ष 2030 तक विस्तार देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
7,014 नई योजनाओं से बदलेगी बिहार के खेतों की तस्वीर
लघु जल संसाधन मंत्री ने बताया कि भविष्य की सिंचाई जरूरतों को पूरा करने के लिए उप विकास आयुक्त (DDC) की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन कर राज्यभर में सतही सिंचाई योजनाओं का सघन सर्वेक्षण कराया गया है। इस सर्वे के आधार पर राज्य में कुल 7,014 नई योजनाओं को चिह्नित किया गया है। इन योजनाओं के चरणबद्ध तरीके से लागू होने के बाद बिहार में लगभग 7,56,380 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का पुनर्स्थापन (रिस्टोरेशन) हो सकेगा, जिससे लाखों किसानों को सीधे फायदा पहुंचेगा।
केंद्रीय जल आयोग को भेजा गया 274.83 करोड़ का प्रस्ताव
डॉ. संतोष कुमार सुमन ने जानकारी दी कि 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' के अंतर्गत बिहार सरकार ने 274.834 करोड़ रुपये की लागत वाली 105 महत्वपूर्ण योजनाओं का एक विस्तृत प्रस्ताव 'केंद्रीय जल आयोग' (CWC), पटना को भेजा है। केंद्र सरकार से इसकी प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति मिलते ही इन योजनाओं पर धरातल पर काम शुरू हो जाएगा। इससे राज्य को करीब 21,490 हेक्टेयर की अतिरिक्त सिंचाई क्षमता प्राप्त होगी।
आंकड़ों की नजर से लघु जल संसाधन विभाग की प्रमुख उपलब्धियां
- अधूरे प्रोजेक्ट्स पूरे: पहले चरण की 2,537 योजनाओं में से 2,371 और दूसरे चरण की 2,256 योजनाओं में से 1,837 योजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
- बजट और क्षमता: विभागीय स्तर पर विभिन्न योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए 1110.67 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है, जिसके जरिए अब तक 4.79 लाख हेक्टेयर से अधिक सिंचाई क्षमता का पुनर्स्थापन किया जा चुका है।
- किसानों को सीधा लाभ (DBT): राज्य के 35 हजार किसानों को सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से वित्तीय अनुदान दिया गया है, जिससे 1.75 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है।
- नई सिंचाई योजनाएं: भागलपुर, औरंगाबाद, गया और नालंदा जिलों के लिए 87.06 करोड़ रुपये की नई सिंचाई योजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिससे लगभग 3,730 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता पैदा होगी।
- अभियानों का विस्तार: सफलता के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए राज्य के महत्वाकांक्षी 'जल-जीवन-हरियाली अभियान' को भी वर्ष 2030 तक के लिए बढ़ा दिया गया है।
बड़े पैमाने पर बहाली और इंजीनियरों को IIT में स्पेशल ट्रेनिंग
कृषि और सिंचाई अवसंरचना को तकनीकी रूप से मजबूत करने के लिए विभाग ने मानव संसाधन पर विशेष जोर दिया है। मंत्री ने बताया कि साल 2020 के बाद विभाग के अंतर्गत कुल 71 सहायक अभियंताओं (Assistant Engineers) और 431 कनीय अभियंताओं (Junior Engineers) की पारदर्शी तरीके से नियुक्ति की गई है। इसमें सिविल इंजीनियरिंग के 44 सहायक व 304 कनीय अभियंता और मैकेनिकल इंजीनियरिंग के 27 सहायक व 127 कनीय अभियंता शामिल हैं। इन नवनियुक्त और सेवारत अभियंताओं की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए सरकार उन्हें IIT रुड़की और एनआईएच (NIH - नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलाजी) जैसे देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण दिला रही है।