स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहा काला कारोबार,बिहार में फर्जी अल्ट्रासाउंड सेंटरों का भंडाफोड़,पटना में मचा हड़कंप

Bihar Health News: बिहार के स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती और अनदेखी के चलते सूबे में फर्ज़ी और गैर-कानूनी (बिना रजिस्ट्रेशन) अल्ट्रासाउंड सेंटरों का मकरजाल तेजी से फैल रहा है। ...

Illegal Ultrasound Clinics Surge in Bihar
स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहा काला कारोबार- फोटो : social Media

Bihar Health News: बिहार के स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती और अनदेखी के चलते सूबे में फर्ज़ी और गैर-कानूनी (बिना रजिस्ट्रेशन) अल्ट्रासाउंड सेंटरों का मकरजाल तेजी से फैल रहा है। राज्य स्वास्थ्य समिति से सूचना के अधिकार  के तहत हासिल जानकारी ने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है।आरटीआई के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 10 अहम जिलों में कुल 1,963 अल्ट्रासाउंड सेंटरों में से 775 सेंटर बिना किसी रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से चल रहे हैं।

 कानूनन इन सेंटरों का PC-PNDT एक्ट के तहत निबंधन होना बेहद जरुरी है, लेकिन महज़ 1,188 सेंटरों के पास ही इसका वैध कागज़ात मौजूद है।राजधानी पटना की बदहाली और जिलों का पूरा लेखा-जोखासबसे शर्मनाक और संजीदा स्थिति राजधानी पटना की है, जहाँ कुल 556 अल्ट्रासाउंड सेंटरों में से 180 सेंटर बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं। यानी पटना में हर तीसरा सेंटरगैर-कानूनी तरीके से मरीजों की जिंदगी और सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा है।

सरकारी अस्पतालों (PHC व CHC) के आसपास इन फर्जी दुकानों का ताना-बाना कुछ इस प्रकार है:पूर्वी व पश्चिमी चंपारण: पूर्वी चंपारण में 130 और पश्चिमी चंपारण में 90 सेंटर बिना निबंधन चल रहे हैं।

मधुबनी व दरभंगा: दोनों जिलों में 70-70 फर्जी अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हैं।

रोहतास, सारण व पूर्णिया: रोहतास में 55, जबकि सारण और पूर्णिया में 50-50 फर्जी दुकानें कायम हैं।

गोपालगंज व बक्सर: गोपालगंज में 45 और बक्सर में 35 सेंटर बिना लाइसेंस अवाम की जेब काट रहे हैं।

देहाती और ग्रामीण इलाकों में सरकारी अस्पतालों के अंदर मशीनों या रेडियोलॉजिस्ट की कमी का पूरा फायदा यह फर्जी सेंटर उठा रहे हैं। दूर-दराज से आने वाले गरीब मरीज और उनके परिजन बिना जांच-पड़ताल किए इन सेंटरों पर जाने को मजबूर हैं।निजी फर्जी सेंटरों पर न केवल मरीजों से बेहिसाब रकम वसूली जा रही है, बल्कि फर्जी या गलत जांच रिपोर्ट्स सौंपने के संगीन आरोप भी सामने आ रहे हैं, जिससे मरीजों के गलत इलाज का खतरा कई गुना बढ़ गया है।दूसरी तरफ, न्यू गार्डिनर रोड, गर्दनीबाग और दानापुर जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों में मशीनें धूल फांक रही हैं क्योंकि वहां रेडियोलॉजिस्ट तैनात नहीं हैं। अगर सरकार ने वक्त रहते इन फर्जी सेंटरों पर नकेल न कसी और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की बहाली न की, तो लोगों को यूं ही अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ेगी।