आईआईटी पटना स्कूल विवाद: हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद झुका संस्थान, याचिकाकर्ता को वापस मिला स्कूल का कब्जा
पटना हाईकोर्ट ने आईआईटी पटना परिसर स्थित स्कूल को बंद करने के आदेश पर रोक लगा दी है। जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की पीठ ने छात्रों के हित में स्कूल संचालन बहाल करने का निर्देश दिया।
Patna - : पटना हाईकोर्ट के कड़े हस्तक्षेप के बाद आईआईटी (IIT) पटना परिसर में चल रहे स्कूल संचालन को लेकर जारी अनिश्चितता खत्म हो गई है। न्यायालय के आदेश के बाद आईआईटी प्रशासन ने न केवल स्कूल का संचालन बहाल किया, बल्कि भवन और संसाधनों का पूरा कब्जा भी याचिकाकर्ता पक्ष को सौंप दिया है। इस फैसले से स्कूल में पढ़ रहे सैकड़ों छात्रों और उनके अभिभावकों ने बड़ी राहत की सांस ली है।
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, 'विवश्वान एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी' द्वारा संचालित इस स्कूल को आईआईटी पटना ने 19 मार्च 2026 को एक नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के जरिए वर्ष 2016 में हुए समझौते को तत्काल प्रभाव से समाप्त करते हुए स्कूल बंद करने और परिसर खाली करने का आदेश दिया गया था। सोसायटी ने इस आदेश को मनमाना और अवैध बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि पूर्व के समझौते के अनुसार उन्हें 2027-28 के शैक्षणिक सत्र तक स्कूल संचालन की अनुमति मिली हुई है।
छात्रों के हित में हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की पीठ ने 31 मार्च 2026 को अंतरिम राहत प्रदान की थी। कोर्ट ने आईआईटी पटना के नोटिस पर रोक लगाते हुए स्पष्ट कहा था कि सैकड़ों छात्रों के भविष्य और हितों को देखते हुए स्कूल के संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना उचित नहीं है। अदालत ने संस्थान को स्कूल का संचालन यथावत जारी रखने का निर्देश दिया था।
निदेशक ने कोर्ट को दी अनुपालन की जानकारी
आज हुई सुनवाई के दौरान आईआईटी पटना के निदेशक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए (या हलफनामे के माध्यम से अवगत कराया)। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि कोर्ट के आदेश का पूर्ण अनुपालन कर लिया गया है। स्कूल भवन की चाबियां, सभी संसाधन और जरूरी दस्तावेज याचिकाकर्ता के प्रधानाचार्य को सुपुर्द कर दिए गए हैं, जिससे अब स्कूल का शैक्षणिक कार्य सुचारू रूप से चल सकेगा।
अगली सुनवाई 15 मई को
हाईकोर्ट ने इस मामले में आईआईटी पटना को अब 15 अप्रैल 2026 तक विस्तृत शपथपत्र (Counter Affidavit) दाखिल करने का समय दिया है। अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 मई 2026 को करेगी। कानूनी जानकारों का मानना है कि कोर्ट का यह रुख शिक्षण संस्थानों में छात्रों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा उदाहरण है।