Food safety: हॉर्लिक्स से नेस्कैफे तक पर FSSAI का शिकंजा, कंपनी वाले करते हैं फर्जी दावा! किडनी मरीजों के पोषण पाउडर पर भी सवाल, आंख मूंदकर कर विश्वास करने वाले सावधान!

Food safety: बाजार में बिकने वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर किए जाने वाले बड़े-बड़े दावों को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरणने सख्त रुख अख्तियार किया है। ...

FSSAI Notices HUL Nestle Over Food Claims
सावधान! पैकेट पर एक बात, पीछे दूसरी!- फोटो : reporter

Food safety: बाजार में बिकने वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर किए जाने वाले बड़े-बड़े दावों को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने सख्त रुख अख्तियार किया है। हॉर्लिक्स से लेकर नेस्कैफे तक के उत्पाद नियामक की जांच के दायरे में आ गए हैं। कहीं ‘अतिरिक्त चीनी नहीं मिलाने’ के दावे पर सवाल है, तो कहीं हड्डियों को मजबूत बनाने और बच्चे के स्वस्थ जन्म वजन से जुड़े दावों की पड़ताल हो रही है। एफएसएसएआई ने हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) और नेस्ले इंडिया समेत संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस कार्रवाई ने खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग, विज्ञापन और पोषण संबंधी दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नेस्कैफे की पैकेजिंग और ऑनलाइन जानकारी पर सवाल

नेस्ले इंडिया के नेस्कैफे इंटेंस कैफे कैपुचीनो, नेस्कैफे चोको मोचा और नेस्कैफे चिल्ड लैटे भी जांच के दायरे में हैं। नियामक के अनुसार, इन उत्पादों के पैकेट के सामने ‘स्वादयुक्त दूध’ लिखा था, जबकि पीछे इन्हें ‘दुग्ध आधारित पेय’ बताया गया। ऑनलाइन मंचों पर भी इन्हें ‘कॉफी के स्वाद वाला दूध’ बताकर सूचीबद्ध किया गया था।पैकेट और ऑनलाइन जानकारी में इस अंतर को लेकर नेस्ले इंडिया के साथ निर्माता कंपनियों श्राइबर डायनेमिक्स डेयरीज और लोटस डेयरी प्रोडक्ट्स से भी जवाब मांगा गया है।

किडनी मरीजों के पोषण पाउडर पर भी कार्रवाई

नेस्ले के रिसोर्स रीनल वनीला फ्लेवर पाउडर पर भी एफएसएसएआई ने सवाल उठाए हैं। यह उत्पाद लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे कुछ मरीजों की विशेष पोषण संबंधी जरूरतों के लिए बनाया गया है। नियामक के मुताबिक, इस श्रेणी के उत्पादों के लिए जरूरी मंजूरी लेना अनिवार्य है। संबंधित उत्पाद को आवश्यक मंजूरी और पैकेट पर शाकाहारी या मांसाहारी होने का चिह्न मौजूद होने के संबंध में सवालों का सामना करना पड़ रहा है।

हॉर्लिक्स के चीनी नहीं मिलाने वाले दावे पर सवाल

एचयूएल के हॉर्लिक्स वुमेन्स प्लस चॉकलेट पोषण पेय के लेबल पर हड्डियों को मजबूत बनाने, छह महीने में हड्डियों की सेहत में सुधार और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने जैसे दावे किए गए हैं। एफएसएसएआई ने इन दावों के साथ ‘स्वस्थ मांसपेशियां’ शब्द के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है। नियामक के मुताबिक, खाद्य उत्पादों पर ‘स्वस्थ’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के अनुरूप होना चाहिए।

सबसे अहम सवाल ‘अतिरिक्त चीनी नहीं मिलाने’ के दावे को लेकर उठा है। एफएसएसएआई के अनुसार, उत्पाद में माल्टोडेक्सट्रिन मौजूद है, जिससे इस दावे की स्वीकार्यता पर सवाल खड़ा हुआ है। इसके अलावा कैल्शियम, विटामिन डी और के-2 की 100 प्रतिशत अनुशंसित दैनिक मात्रा उपलब्ध कराने से संबंधित दावों पर भी आपत्ति जताई गई है।

मदर्स हॉर्लिक्स के दावों पर भी घिरी कंपनी

एचयूएल के हॉर्लिक्स मदर्स प्लस केसर के 400 ग्राम पैक पर लिखे ‘स्वस्थ जन्म वजन’ और विज्ञापन में इस्तेमाल किए गए ‘बच्चे के स्वस्थ जन्म वजन के लिए’ जैसे दावों को लेकर भी नियामक ने जवाब मांगा है। एफएसएसएआई की आपत्ति है कि ऐसी भाषा से उपभोक्ताओं के बीच यह धारणा बन सकती है कि इस उत्पाद के सेवन से बच्चे का जन्म वजन स्वस्थ रहेगा। अब कंपनी को इन दावों के समर्थन में अपना पक्ष रखना होगा।

कंपनियों से जवाब तलब, उपभोक्ताओं के लिए अहम सवाल

एफएसएसएआई की इस कार्रवाई ने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर लिखे आकर्षक दावों और पोषण संबंधी जानकारी की पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है। हालांकि, नोटिस जारी होना अंतिम दोषसिद्धि नहीं है। अब संबंधित कंपनियों के जवाब और नियामक की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।उपभोक्ताओं के लिए भी यह मामला अहम है। पैकेट पर लिखे हर दावे को आंख मूंदकर सच मानने के बजाय खाद्य सामग्री, पोषण संबंधी विवरण और लेबलिंग को ध्यान से पढ़ना जरूरी है। आखिरकार, सेहत से जुड़े बड़े-बड़े दावों की असलियत और उनकी नियमों के अनुरूपता का पता लगना उपभोक्ता हितों की हिफाजत के लिए बेहद जरूरी है।