Bihar Diwas 2026: पांच दिवसीय महिला नाट्य उत्सव का हुआ आगाज़, 'पारो' नाटक ने झकझोर दी सामाजिक कुरीतियों की जड़ें
Bihar Diwas 2026: बिहार दिवस को लेकर पांच दिवसीय नाट्य उत्सव की शुरुआत हो गयी है. पहले दिन 'पारो' नाटक का मंचन किया गया........पढ़िए आगे
PATNA : कला एवं संस्कृति विभाग तथा बिहार संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में बिहार दिवस के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय महिला नाट्य उत्सव का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने किया। इस अवसर पर मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि 114वां बिहार दिवस हम सभी के लिए हर्ष का विषय है। बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं पुनर्जीवित करने की दिशा में इस प्रकार के आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि आगामी पांच दिनों तक विभिन्न नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से नाट्य विधा का उत्कृष्ट मंचन देखने को मिलेगा।
उन्होंने आगे कहा कि जिस गति से बिहार विकास की ओर अग्रसर है, उसी गति से राज्य की कला और संस्कृति को भी आगे बढ़ाना आवश्यक है। सरकार कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना के माध्यम से राज्य के वृद्ध कलाकारों को सम्मान देने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, विलुप्त हो रही लोक कलाओं को बचाने के लिए भी सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जब तक लोकसंस्कृति जीवित है, तब तक राज्य की आत्मा जीवित रहती है। मंत्री ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में बिहार को एक विकसित राज्य के रूप में स्थापित किया जाएगा।
उत्सव के प्रथम दिवस पर प्रस्तुति संस्था की तरफ से प्रसिद्ध साहित्यकार नागार्जुन के उपन्यास ‘पारो’ पर आधारित नाटक “पारो” का मंचन किया गया। इस नाटक का नाट्य रूपांतरण विवेक कुमार द्वारा किया गया है तथा निर्देशन शारदा सिंह ने किया। संगीत संयोजन वरिष्ठ रंग-निर्देशक संजय उपाध्याय द्वारा किया गया। नाटक में 20वीं सदी के पूर्वार्द्ध के मिथिला क्षेत्र की सामाजिक कुरीतियों, विशेषकर बाल विवाह, बहुविवाह एवं बेमेल विवाह का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया गया। कथा की नायिका ‘पारो’, जो एक निर्धन ब्राह्मण परिवार की मात्र तेरह वर्षीय बालिका है, इन कुरीतियों की शिकार बनती है और अंततः प्रसव पीड़ा के दौरान उसकी मृत्यु हो जाती है। नाटक ने दर्शकों को भावुक करते हुए समाज में व्याप्त कुप्रथाओं पर गंभीर चिंतन करने को प्रेरित किया।
इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक रूबी, संग्रहालय निदेशालय के निदेशक कृष्ण कुमार एवं बिहार संगीत नाटक अकादमी की सहायक सचिव कीर्ति आलोक उपस्थित रहीं।