Bihar News : इंडियन विटामिन-डी डे की पूर्व संध्या पर बोले फिजिशियन डॉ. दिवाकर तेजस्वी, कहा- 'भरपूर धूप वाले देश भारत में भी बड़ी आबादी विटामिन-डी की कमी से है पीड़ित'
Bihar News : वरिष्ठ फिजिशियन ने स्पष्ट किया कि अधिकांश लोग विटामिन-डी को केवल हड्डियों की मजबूती से जोड़कर देखते हैं, जबकि यह धारणा अधूरी है।
PATNA : पब्लिक अवेयरनेस फॉर हेल्थफुल एपरोच फॉर लिविंग (पहल) के चिकित्सा निदेशक एवं वरिष्ठ फिजिशियन डॉ0 दिवाकर तेजस्वी ने 21 जून को मनाए जाने वाले इंडियन ’’विटामिन-डी डे’’ की पूर्व संध्या पर कहा कि वर्ष के सबसे लंबे दिन 21 जून (ग्रीष्म अयनांत) को भारत में इंडियन ’’विटामिन-डी डे’’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को विटामिन-डी के महत्व, सुरक्षित धूप के लाभ तथा विटामिन-डी की कमी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति जागरूक करना है।
डॉ0 तेजस्वी ने बताया कि विडंबना यह है कि भरपूर धूप वाले देश भारत में भी बड़ी संख्या में लोग विटामिन-डी की कमी से पीड़ित हैं। बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक घर एवं कार्यालयों में रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी तथा धूप से बचने की आदत इसके प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि विटामिन-डी केवल हड्डियों को मजबूत बनाने वाला विटामिन नहीं है, बल्कि यह शरीर में कैल्शियम के अवशोषण, मांसपेशियों की शक्ति, रोग प्रतिरोधक क्षमता, तंत्रिका तंत्र के बेहतर कार्य, संतुलन बनाए रखने तथा स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। पर्याप्त विटामिन-डी बच्चों की हड्डियों के विकास, युवाओं की कार्यक्षमता तथा बुजुर्गों में गिरने और हड्डी टूटने के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डॉ0 तेजस्वी ने बताया कि विटामिन-डी की कमी होने पर लगातार थकान, शरीर एवं हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी, बार-बार ऐंठन, कमर दर्द, बार-बार संक्रमण होना, घाव भरने में देरी तथा बुजुर्गों में गिरने और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों में इसकी कमी से रिकेट्स तथा वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया एवं ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं।
उन्होंने सलाह दी कि सप्ताह में 3-4 दिन लगभग 15-30 मिनट तक सुरक्षित रूप से धूप लेना, संतुलित एवं पौष्टिक आहार अपनाना तथा नियमित व्यायाम करना विटामिन-डी के स्तर को बनाए रखने में सहायक है। जिन लोगों में विटामिन-डी की कमी की पुष्टि हो चुकी है अथवा जिनमें इसके लक्षण हैं, उन्हें स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय देख-रेख में ही विटामिन-डी की जाँच, उचित मात्रा में सप्लीमेंट तथा नियमित फॉलो-अप कराना चाहिए, क्योंकि आवश्यकता से अधिक विटामिन-डी लेना भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
डॉ0 तेजस्वी ने लोगों से अपील की कि इंडियन विटामिन-डी डे के अवसर पर परिवार और समाज में विटामिन-डी के प्रति जागरूकता बढ़ाएँ, सुरक्षित धूप को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएँ तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हड्डियों और संपूर्ण स्वास्थ्य की रक्षा करें।