Bihar Police: थानेदार की मनमानी खत्म! DGP विनय कुमार का नया आदेश, FIR लिखने में की आनाकानी तो सीधे नपेंगे अधिकारी
Bihar Police: बिहार में जीरो एफआईआर को लेकर अब डीजीपी ने सख्त रुख अपना लिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि थानों में अब किसी भी शिकायत को दर्ज करने में टालमटोल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके लिए नई एसओपी लागू कर दी गई है।
Bihar Police: बिहार के DGP ने राज्य के सभी थानों को सख्त निर्देश जारी करते हुए 'Zero FIR' पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। अब अगर आपके साथ कहीं भी कोई अपराध होता है, तो आप पास के किसी भी थाने में जाकर मामला दर्ज करा सकते हैं। थानेदार अब यह कहकर आपको नहीं भगा पाएंगे कि "यह इलाका हमारे थाने में नहीं आता।" DGP के इस मास्टर प्लान का सीधा मकसद आम जनता को न्याय दिलाना और पुलिसिंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है। अगर अब कोई अधिकारी केस दर्ज करने में आनाकानी करता है, तो उस पर गाज गिरना तय है।
किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं
दरअसल, बिहार के थानों में जीरो एफआईआर को लेकर अब किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने इस व्यवस्था को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है। यह व्यवस्था भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 के तहत लागू की गई है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश के अनुसार, अब किसी भी थाने में क्षेत्राधिकार से बाहर हुए अपराध की सूचना मिलने पर उसे तुरंत दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसी को जीरो एफआईआर कहा जाता है, जिसका उद्देश्य पीड़ित की शिकायत बिना देरी दर्ज कर कार्रवाई तेज करना है।
डीजीपी विनय का आदेश
डीजीपी विनय कुमार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जीरो एफआईआर की सूचना मौखिक या डिजिटल दोनों माध्यमों से दी जा सकती है। मौखिक सूचना को लिखित रूप में दर्ज कर सूचनादाता को पढ़कर सुनाया जाएगा और उनके हस्ताक्षर लिए जाएंगे। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दी गई सूचना पर तीन दिनों के भीतर हस्ताक्षर करना अनिवार्य होगा।
अधिसूचित प्रपत्र में होगी एंट्री
नई व्यवस्था के तहत जीरो एफआईआर को गृह विभाग द्वारा अधिसूचित प्रपत्र में ही दर्ज किया जाएगा और स्टेशन डायरी में भी इसका उल्लेख किया जाएगा। इसके बाद संबंधित थाने को मामला तुरंत सीसीटीएनएस के माध्यम से ट्रांसफर किया जाएगा। हर थाने से लेकर एसपी कार्यालय तक जीरो एफआईआर का अलग रजिस्टर मेंटेन किया जाएगा। एक रजिस्टर में थाने में दर्ज मामलों का ब्योरा होगा, जबकि दूसरे में अन्य थानों से प्राप्त मामलों का विवरण रखा जाएगा। इसकी रिपोर्ट हर महीने एसपी को भेजी जाएगी और समीक्षा बैठक में इसकी जांच होगी। अंचल निरीक्षक साप्ताहिक, एसडीपीओ पखवाड़े में और आईजी, डीआईजी व एसपी निरीक्षण के दौरान रजिस्टर की जांच करेंगे। जिन थानों में सीसीटीएनएस सुविधा नहीं है, वहां से रजिस्टर्ड डाक के जरिए जीरो एफआईआर भेजी जाएगी।
महिलाओं और दिव्यांगों के लिए विशेष प्रावधान
बीएनएसएस 2023 की धाराओं के तहत महिलाओं द्वारा दी गई शिकायत महिला पुलिस अधिकारी ही दर्ज करेंगी। वहीं मानसिक या शारीरिक रूप से दिव्यांग पीड़ितों की शिकायत उनके घर जाकर विशेष शिक्षक की उपस्थिति में दर्ज की जाएगी। पुलिस मुख्यालय के इस फैसले से राज्य में अपराध दर्ज करने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और त्वरित होने की उम्मीद जताई जा रही है।