Bihar News : भ्रष्ट अफसरों पर कसा निगरानी का शिकंजा, सात महीनों में 11 आरोपियों को मिली सजा, नवादा के पूर्व CO को 4 साल की हुई जेल

Bihar News : वर्ष 2026 में जनवरी से 22 जुलाई के बीच निगरानी ब्यूरो ने मजबूत पैरोकारी के दम पर 11 अलग-अलग मामलों में 11 अभियुक्तों को दोषी करार कराते हुए सजा दिलाई है।

Bihar News : भ्रष्ट अफसरों पर कसा निगरानी का शिकंजा, सात मही
घूसखोरों को सजा - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : निगरानी अन्वेषण ब्यूरो सिर्फ भ्रष्ट लोकसेवकों को दबोचने में ही आगे नहीं है। बल्कि, इन्हें सजा दिलाने की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इस वर्ष जनवरी से 22 जुलाई तक 11 कांड़ों में 11 अभियुक्तों को कोर्ट से दोषी करार कराते हुए सजा दिलाई गई है। इस फेहरिस्त में 22 जुलाई को नवादा जिला के रोह अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी भोला पासवान को अधिकतम 4 वर्ष कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थिक दंड की सजा सुनाई गई है। उन्हें 2014 में 4 हजार रुपये घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। इन्हें भ्रष्टाचार निवारण निरोध अधिनियम की दो अलग-अलग धाराओं में 3 एवं 4 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेगी। इस तरह इन्हें अधिकतम 4 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा मिली है। 

निगरानी के स्तर से पिछले वर्ष 30 भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाई गई थी। यह आंकड़ा पिछले 25 वर्षों में सर्वाधिक है। वर्ष 2000 एवं 2001 में महज 2 भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाई गई थी। 2002 एवं 2005 में सजा दिलाने वालों की संख्या शून्य थी। इसके बाद बीच के कुछ वर्षों को छोड़ दें, तो 2024 में 18 दोषियों को सजा दिलाई गई थी, लेकिन 2025 में इससे डेढ़ गुणा से अधिक यानी 30 दोषियों को सजा दिलाई गई। यह आंकड़े पिछले 25 वर्षों में रिकॉर्ड सर्वाधिक है। इसमें कई ऐसे आरोपियों को सजा दिलाई गई, जो रंगे हाथ गिरफ्तार होने के बाद लंबे से बचते आ रहे थे। परंतु इन सभी को दोषी करार कराते हुए सजा दिलाई गई। जबकि, इस वर्ष सात महीने में ही 11 आरोपियों को सजा दिलाई जा चुकी है। आगामी पांच महीने में इस संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना है। 

मौजूदा वर्ष में पहली सजा जनवरी अंत में सुनाई गई। इसमें वैशाली जिला के तत्कालीन रेंजर सीताराम चौधरी को एक वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई। उन्हें 1997 में डेढ़ हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद फरवरी में ग्रामीण विकास विभाग के नवादा स्थित विशेष प्रमंडल के तत्कालीन कनीय अभियंता जयराम सिंह को एक वर्ष सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई गई थी। आरोपी जयराम सिंह को 2008 में 3 हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था। फरवरी में इन्हें लगाकर तीन आरोपियों को सजा दिलाई गई। इसके अतिरिक्त मार्च, अप्रैल, मई, जून एवं जुलाई में एक-एक आरोपी को सजा दिलाई जा चुकी है। 

इस मामले में निगरानी विभाग के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार का कहना है कि सतत मॉनीटरिंग, गवाहों की बिना किसी तारीख के छूटे निरंतर कोर्ट में पेशी, साक्ष्यों को सही एवं सशक्त तरीके से कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने के अतिरिक्त विशेषज्ञ कानूनविदों की टीम को मामलों का सही तरीके से मंथन करने से लेकर इन्हें कोर्ट के समक्ष तर्क संगत तरीके से प्रस्तुत करने के लिए रखा गया है। इन कारणों से सजा दिलाने की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी हुई है। आने वाले समय में इसमें और बढ़ोतरी होने की संभावना है।