कांग्रेस का ’’तानाशाही डीएनए’’ आज भी बरकरार, राहुल के अहंकार और अंतर्कलह के कारण हो रहा है पार्टी का पतनः मंगल पांडेय
उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 की वह काली रात कोई भूल नहीं सकता, जब कांग्रेस ने देश के नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए, न्यायपालिका की अवहेलना की और मीडिया पर सेंसरशिप लगा दी।
Bihar News : भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने 1975 के काले आपातकाल (इमरजेंसी) की 51वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे शर्मनाक अध्याय है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता बचाने के लिए देशहित में आवाज उठाने वाली जनता को गुनहकार बना दिया था। श्री पांडेय ने कहा कि जो तानाशाही रवैया और अहंकार इंदिरा गांधी के समय कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में था, वही ’’तानाशाही डीएनए’’ आज श्री राहुल गांधी के रूप में कांग्रेस को गर्त में ले जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 की वह काली रात कोई भूल नहीं सकता, जब कांग्रेस ने देश के नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए, न्यायपालिका की अवहेलना की और मीडिया पर सेंसरशिप लगा दी। लाखों देशभक्तों और विपक्षी नेताओं को बिना कसूर सजा दे दिया। यह आपातकाल कांग्रेस की सत्ता लोलुपता और अलोकतांत्रिक चरित्र का सबसे बड़ा प्रमाण था। वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि आपातकाल की जनक इंदिरा गांधी के उसी अड़ियल और तानाशाह रवैये की झलक आज राहुल गांधी में साफ दिखाई देती है। राहुल बिना किसी जवाबदेही के पार्टी को अपनी व्यक्तिगत जागीर की तरह चला रहे हैं। उनकी लगातार विफलताओं और संगठनात्मक नाकामी के बावजूद, पार्टी के भीतर किसी को भी सच बोलने की आजादी नहीं है।
पांडेय ने कहा कि राहुल गांधी के इसी तानाशाही और अहंकारपूर्ण व्यवहार के कारण आज कांग्रेस के भीतर भयंकर अंतर्कलह मची हुई है। पार्टी के जमीनी, कर्मठ और वरिष्ठ नेता खुद को उपेक्षित और अपमानित महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि देश भर के बड़े और कद्दावर नेता लगातार कांग्रेस छोड़कर जा रहे हैं। कांग्रेस आज एक डूबता हुआ जहाज बन चुकी है, जिसके कप्तान के पास न कोई विजन है और न ही लोकतांत्रिक मूल्य। राहुल की नीतियां और उनकी नाकामी आज जगजाहिर है।
उन्होंने कहा, वह देश की जनता की नब्ज समझने में पूरी तरह असफल रहे हैं। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी केवल नकारात्मकता और विभाजनकारी राजनीति में व्यस्त हैं।