छठ महापर्व को लेकर UNESCO करेगा बड़ा फैसला, बिहार के लिए बड़ी खुशखबरी

छठ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की भारत की कोशिश रंग ला सकती है, भारत और मॉरीशस ने मिलकर यूनेस्को में प्रस्ताव भेजा है जिसे लेकर अगले साल दिसंबर में होने वाली बैठक में होगा फैसला.

Chhath Puja
Chhath Puja - फोटो : news4nation

Bihar News :  बिहार समेत पूरे देश के करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े छठ महापर्व को जल्द ही वैश्विक पहचान मिल सकती है। सूर्य उपासना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक छठ पर्व को यूनेस्को (UNESCO) की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिष्ठित सूची में शामिल करने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। भारत ने मॉरीशस के साथ मिलकर छठ महापर्व को इस सूची में शामिल करने के लिए संयुक्त नामांकन भेजा है। यूनेस्को सचिवालय ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि अगले साल दिसंबर में होने वाली बैठक में इस पर मुहर लग सकती है।


पहली बार भारत ने दूसरे देश के साथ भेजा संयुक्त प्रस्ताव

संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, भारत ने पहली बार किसी दूसरे देश के साथ मिलकर बहुराष्ट्रीय नामांकन प्रस्तुत किया है। इससे पहले भारत की ओर से दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराया गया था। चूंकि पिछले चक्र में भारत के नामांकन पर विचार हो चुका है, इसलिए नियमों के तहत इस बार छठ के प्रस्ताव पर फैसला नहीं होगा। इसे अगले साल दिसंबर में होने वाली बैठक में विचार के लिए रखा जा सकता है। भारत और मॉरीशस ने दिसंबर में संयुक्त प्रस्ताव भेजा था। जरूरी दस्तावेज पूरे होने के बाद मार्च में यूनेस्को सचिवालय ने इसे स्वीकार कर लिया।


छठ को मिलेगी वैश्विक पहचान

छठ महापर्व भगवान सूर्य और छठी मइया की उपासना का पर्व है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में इसकी विशेष महत्ता है। भारत के अलावा मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, संयुक्त अरब अमीरात और नीदरलैंड जैसे देशों में भी भारतीय मूल के लोग इसे श्रद्धा के साथ मनाते हैं। छठ की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ाव है। इस पर्व में जल, सूर्य, स्वच्छता और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सम्मान का संदेश मिलता है। इसकी परंपरा जाति, धर्म और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर सामूहिक भागीदारी और समानता की भावना को मजबूत करती है।


मॉरीशस से भारत का गहरा सांस्कृतिक रिश्ता

छठ को लेकर भारत और मॉरीशस का संयुक्त प्रस्ताव दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी दर्शाता है। मॉरीशस की आबादी में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी हिस्सेदारी है। ब्रिटिश शासन के दौरान 1834 से 20वीं सदी की शुरुआत तक करीब पांच लाख भारतीय मजदूरों को गिरमिटिया श्रमिकों के रूप में मॉरीशस ले जाया गया था। वे अपने साथ भारतीय परंपराएं और त्योहार भी लेकर गए। समय के साथ छठ वहां भारतीय समुदाय की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।


यूनेस्को की सूची में अब तक भारत की 16 अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों को जगह मिल चुकी है। इनमें कुंभ मेला, कोलकाता की दुर्गा पूजा, गरबा, योग, रामलीला, नवरोज और लद्दाख का बौद्ध मंत्रोच्चार जैसी परंपराएं शामिल हैं। अगर छठ महापर्व को भी इस सूची में जगह मिलती है तो यह बिहार की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ भारत की विरासत के लिए भी बड़ी उपलब्धि होगी।