देश के दो खलनायक हैं—पहले मुसलमान, दूसरा ऊँची सवर्ण जाति के लोग, भाजपा के पूर्व सांसद ने दिया बड़ा बयान
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बिहार के बाढ़ में रामनवमी के मंच से सवर्णों और मुस्लिमों को देश का 'खलनायक' बताया। उनके इस बयान की हर तरफ कड़ी निंदा हो रही है। जानें पूरा मामला।
Patna - भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के दबंग पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर अपने जहरीले बयान के कारण विवादों के केंद्र में हैं। गुरुवार को बिहार के बाढ़ में आयोजित रामनवमी शोभायात्रा कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए बृजभूषण ने मंच से ऐसी टिप्पणी कर दी, जिससे न केवल सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है, बल्कि सवर्ण समाज में भी उनके प्रति भारी आक्रोश है।
"देश के दो ही खलनायक..." : सवर्णों और मुस्लिमों पर सीधा हमला
मंच पर खड़े होकर भगवान राम का नाम लेने के बजाय, बृजभूषण शरण सिंह ने जातिगत और धार्मिक विद्वेष फैलाने वाला बयान दिया। उन्होंने खुलेआम कहा कि - "आज दो खलनायक हैं इस देश के अंदर। आज इस देश के अंदर दो खलनायक हैं, मैं जानता हूँ मेरी बात ये बहुत गहरी चोट करेगी। पहला खलनायक मुसलमान, जो हमारे दादा जी भी अभी यहाँ कह रहे थे। हाँ-हाँ, उनकी दृष्टि में केवल मुसलमान ही बचा है और कोई नहीं, सारी समस्या मुसलमान ही है। वही है ये। ठीक भैया, जिंदाबाद आपका। लेकिन मैं बताना चाहता हूँ, पहला खलनायक मुसलमान और दूसरा खलनायक इस समय सवर्ण है, सवर्ण है, सवर्ण... सवर्ण, सवर्ण, सवर्ण, सवर्ण!"
उनके इस बयान ने वहां मौजूद लोगों को सन्न कर दिया। एक ओर जहां देश रामनवमी की खुशियां मना रहा था, वहीं बृजभूषण ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए दो बड़े समुदायों को निशाना बनाया।
सवर्ण समाज और मुस्लिमों में भारी आक्रोश, निंदा की लहर
पूर्व सांसद के इस बेतुके बयान के बाद बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश तक की राजनीति गरमा गई है। सवर्ण समाज के संगठनों ने इसे 'मानसिक दिवालियापन' करार दिया है। लोगों का कहना है कि जिस सवर्ण समाज ने उन्हें सिर आंखों पर बैठाया, उसी समाज को 'खलनायक' कहना उनकी कृतघ्नता को दर्शाता है। वहीं, मुस्लिम समुदाय के प्रति उनकी टिप्पणी ने एक बार फिर उनकी विवादित छवि को पुख्ता कर दिया है।
विवादों से पुराना नाता: फिर घिरे बृजभूषण
यह कोई पहली बार नहीं है जब बृजभूषण शरण सिंह ने मर्यादा लांघी हो। कुश्ती संघ के अध्यक्ष रहते हुए महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के बाद वे पहले ही हाशिए पर हैं। अब बाढ़ की धरती पर इस तरह का बयान देकर उन्होंने आग में घी डालने का काम किया है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और राजनीतिक दलों ने इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उन पर कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
मंच से सरेआम जातीय और धार्मिक टिप्पणी किए जाने के बावजूद स्थानीय प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का पूछना है कि क्या किसी भी बाहरी नेता को बिहार की धरती पर आकर समाज को बांटने और अपमानित करने की खुली छूट दी जाएगी?
रिपोर्ट - रविशंकर कुमार बाढ़।