बिहार परिवहन विभाग में घमासान: ID-पासवर्ड विवाद पर ऑपरेटरों का पलटवार,लिपिकों पर लगाए गंभीर आरोप

बिहार परिवहन विभाग में अंदरूनी कलह तेज! प्रोग्रामर और डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने लिपिकों (Clerks) के आरोपों को 'बेबुनियाद' बताते हुए राज्य परिवहन आयुक्त को पत्र लिखा है।ऑपरेटरों ने मानसिक प्रताड़ना और पूर्व में हुए BS-4 वाहन घोटाले का भी जिक्र किया है।

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बिहार परिवहन विभाग में आंतरिक कलह: लिपिकों के खिलाफ लामबंद हुए ऑपरेटर- फोटो : Reporter

बिहार परिवहन विभाग के भीतर विभागीय लिपिकों (क्लर्कों) और प्रोग्रामर/डाटा एंट्री ऑपरेटरों के बीच का विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। विभाग के प्रोग्रामर और डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने राज्य परिवहन आयुक्त को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर विभागीय लिपिकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 29 मई 2026 को जारी इस पत्र के जरिए ऑपरेटरों ने साफ किया है कि लिपिकों द्वारा उन पर गलत तरीके से आईडी और पासवर्ड मांगने के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से "तथ्यहीन एवं बेबुनियाद" हैं। ऑपरेटरों का कहना है कि यह उनकी छवि को धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश है।


कार्य विभाजन पर दी सफाई, मानसिक प्रताड़ना का लगाया आरोप

राज्य परिवहन आयुक्त को सौंपे गए पत्र में ऑपरेटरों ने दोनों पक्षों के कार्य विभाजन को स्पष्ट करते हुए अपनी स्थिति मजबूत की है। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य काम काउंटर पर आवेदन प्राप्त करना, डाटा एंट्री, शुल्क लेना और ऑनलाइन रिपोर्ट भेजना है, जबकि ओ-ग्रास (O-Grass) के माध्यम से कैश जमा कराना, कैश बुक संधारण और अभिलेखों को सुरक्षित रखना पूरी तरह से लिपिकों की जिम्मेदारी है। ऑपरेटरों का आरोप है कि वे पिछले 10-15 वर्षों से अपनी यूजर आईडी से ईमानदारी पूर्वक कार्य कर रहे हैं, लेकिन अब लिपिकों द्वारा उन पर मनगढ़ंत आरोप लगाकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित और तनावग्रस्त किया जा रहा है।


पुराने घोटाले का जिक्र: BS-4 वाहनों की गलत एंट्री से राजस्व को लगी थी चंपत

अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए ऑपरेटरों ने विभाग में पूर्व में हुए एक बड़े घोटाले का भी हवाला दिया है। पत्र में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि पूर्व में पटना में एक लिपिक द्वारा किसी को अपनी आईडी-पासवर्ड सौंप दी गई थी। इसके बाद उस आईडी का दुरुपयोग कर 500 से अधिक प्रतिबंधित BS-4 वाहनों की गलत तरीके से बैकलॉग एंट्री करा दी गई थी, जिससे बिहार सरकार को भारी राजस्व की हानि उठानी पड़ी थी। ऑपरेटरों का इशारा है कि अपनी कमियों और पिछले कारनामों को छिपाने के लिए अब लिपिकों द्वारा उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।


ऑल डीईओ पटना ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग, आयुक्त को भेजा पत्र

"All DEO, Patna" सहित कई ऑपरेटरों के संयुक्त हस्ताक्षर वाले इस पत्र की प्रतिलिपि (कॉपी) परिवहन विभाग, बिहार के वरिष्ठ अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। पत्र के अंत में प्रोग्रामर और डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने राज्य परिवहन आयुक्त से इस पूरे मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और बेबुनियाद आरोप लगाने वाले लिपिकों के खिलाफ सख्त व निष्पक्ष दंडात्मक कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। अब देखना यह होगा कि इस पत्र के बाद विभाग के शीर्ष अधिकारियों का इस अंदरूनी खींचतान पर क्या रुख रहता है।

धीरज पराशर की रिपोर्ट