बिहार परिवहन विभाग में बड़ा खेल! DTO बनकर भी ADTO का काम कर रहे 18 अफसर, क्यों भड़का विवाद पहुंचा हाईकोर्ट

बिहार के परिवहन विभाग में अजीब स्थिति बन गई है। 6 अप्रैल को प्रोन्नति मिलने के बाद भी 18 विभागीय अधिकारी DTO पद की पोस्टिंग के इंतजार में हैं। 2020 की अधिसूचना के बावजूद बिहार प्रशासनिक सेवा (बिप्रसे) के अधिकारियों को जिलों में तैनात रखा गया है।

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प्रमोशन के बाद भी नहीं मिली DTO की कुर्सी, वेतन नदारद और काम का संकट- फोटो : Reporter

बिहार के परिवहन विभाग में इन दिनों एक अजीबोगरीब स्थिति बनी हुई है, जहां विभागीय अधिकारियों को पदोन्नति (प्रमोशन) तो दे दी गई है, लेकिन उन्हें नई पोस्टिंग का इंतजार लंबा होता जा रहा है। कागजों में प्रमोशन पाकर जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) बन चुके अधिकारी आज भी अपने निचले पद यानी अपर जिला परिवहन पदाधिकारी (ADTO) के रूप में काम करने को मजबूर हैं। विभागीय अनदेखी और अधिकारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ से तंग आकर अब परिवहन सेवा के अधिकारियों ने न्याय के लिए पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।


मामला पहुंचा पटना हाईकोर्ट: 22 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

परिवहन सेवा के तीन अधिकारियों—संतोष कुमार सिंह, दिव्य प्रकाश और रंजीत कुमार—ने पटना हाईकोर्ट में सिविल रिट याचिका (Case No- 12859/2026) दायर की है। याचिका में स्पष्ट कहा गया है कि सरकार ने उन्हें DTO के पद पर प्रोन्नत तो कर दिया, लेकिन उन्हें स्वतंत्र प्रभार देने के बजाय DTO के अधीन ही काम करने पर विवश किया जा रहा है। 24 अगस्त 2026 को जस्टिस रितेश कुमार की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए समय की मांग की, जिसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 22 सितंबर 2026 तय कर दी है।


18 अधिकारी पोस्टिंग के इंतजार में: 6 अप्रैल के आदेश के बाद भी स्थिति जस की तस

विभाग ने 6 अप्रैल 2026 को एक बड़ा फैसला लेते हुए परिवहन सेवा के 17 अधिकारियों को DTO व समकक्ष पद पर पदोन्नत किया था। इनमें 12 ADTO को DTO तथा 5 मोटरयान निरीक्षकों (MVI) को DTO बनाया गया था। इससे पहले धीरेन्द्र कुमार और शशिशेखरम को भी यह प्रोन्नति मिल चुकी थी। इस प्रकार विभाग में DTO स्तर के कुल 19 अधिकारी उपलब्ध हैं। हालांकि, गोपालगंज DTO शशिशेखरम को छोड़ दें तो बाकी के 18 कैडर अधिकारी महीनों से अपनी नई पोस्टिंग की राह देख रहे हैं या पुराने पदों पर ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


बिप्रसे अधिकारियों का कब्जा: 2020 की अधिसूचना और उठते बड़े सवाल

परिवहन विभाग द्वारा 29 जनवरी 2020 को जारी अधिसूचना (तत्कालीन सचिव संजय कुमार अग्रवाल द्वारा हस्ताक्षरित) के अनुसार DTO के 17 पद, उप परिवहन आयुक्त का 1 पद और संयुक्त परिवहन आयुक्त के 2 पद बिहार प्रशासनिक सेवा (बिप्रसे) के लिए आरक्षित हैं। अधिसूचना में यह भी प्रावधान था कि गैर-आरक्षित पदों पर बिप्रसे के अधिकारी तभी तक रहेंगे जब तक परिवहन कैडर के अपने अधिकारी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध न हों। अब जब विभाग के पास 19 DTO मौजूद हैं, तो सवाल उठ रहा है कि शेष जिलों में बिप्रसे के अधिकारियों की तैनाती किस आधार पर जारी है।


वेतन नदारद और काम का संकट: 'ना माया मिली, ना राम' जैसी स्थिति

प्रमोशन मिलने के 4 महीने बीत जाने के बाद भी नई पोस्टिंग न मिलने से अधिकारियों के सामने वेतन और कार्यभार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्यालय में योगदान देने वाले प्रोन्नत DTO अधिकारियों को वेतन किस मद से दिया जाएगा और उनसे क्या काम लिया जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अगर उन्हें स्वतंत्र प्रभार देना ही नहीं था, तो सिर्फ कागजी पदोन्नति देने का क्या औचित्य था। इससे अधिकारियों के मनोबल पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।


सामान्य प्रशासन विभाग का दखल: परिवहन मंत्री और विभागीय तंत्र बेबस

इस पूरे गतिरोध के पीछे अंतर-विभागीय हस्तक्षेप को मुख्य वजह माना जा रहा है। सूत्रों और एक परिवहन अधिकारी के अनुसार, परिवहन विभाग में मंत्री (दामोदर रावत), सचिव या आयुक्त की मंशा के विपरीत तबादले और पोस्टिंग का पूरा नियंत्रण सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के हाथों में चला गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा बिप्रसे अधिकारियों की लगातार तैनाती किए जाने के कारण परिवहन कैडर के अपने अधिकारियों का हक मारा जा रहा है। यह स्थिति पूरी व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।