Bihar Urban Bodies: बिहार में बदल जाएगा शहरों का नक्शा! पढ़िए क्यों हो रहा है नगर निकायों का पुनर्गठन?

Bihar Urban Bodies:बिहार में आने वाले दिनों में नगर निकायों का नक्शा बदल सकता है। राज्य सरकार ने नगर निकायों के विलय, सीमा विस्तार, दर्जा बढ़ाने और नए नगर निकायों के गठन की कवायद शुरू करने की तैयारी कर ली है।...

Bihar to Restructure Urban Bodies New Municipalities Likely
बिहार में बदल जाएगा शहरों का नक्शा!- फोटो : Hiresh Kumar

Bihar Urban Bodies:बिहार में आने वाले दिनों में नगर निकायों का नक्शा बदल सकता है। राज्य सरकार ने नगर निकायों के विलय, सीमा विस्तार, दर्जा बढ़ाने और नए नगर निकायों के गठन की कवायद शुरू करने की तैयारी कर ली है। इसके लिए सभी जिलों से बाकायदा प्रस्ताव मांगे गए हैं।सरकार की इस पहल के बाद कई छोटे नगर निकायों का बड़े निकायों में विलय हो सकता है, जबकि तेजी से शहरी स्वरूप अख्तियार कर रहे ग्रामीण इलाकों को नगर निकाय का दर्जा मिलने का रास्ता भी खुल सकता है।

नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किया है। डीएम अपने जिले के प्रभारी मंत्री से जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की बैठक बुलाने का अनुरोध करेंगे।इस बैठक में जिले में नगर निकायों से जुड़े तमाम प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा और समीक्षा की जाएगी। इसके बाद समिति की अनुशंसा के आधार पर प्रस्ताव आगे सरकार को भेजे जाएंगे।

सरकार नगर निकायों के पुनर्गठन के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें दो या उससे अधिक नगर निकायों को मिलाकर नया निकाय बनाना प्रमुख विकल्प है।इसके अलावा मौजूदा नगर निकाय से सटे ग्रामीण इलाकों को भी उसकी सीमा में शामिल किया जा सकता है। इससे कई शहरों की प्रशासनिक सीमा का दायरा बढ़ने की संभावना है।पुनर्गठन की कवायद में छोटे नगर निकाय भी सरकार के रडार पर हैं। जरूरत और पात्रता के आधार पर छोटे निकायों को किसी बड़े नगर निकाय में शामिल करने या उनका दर्जा बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।यानी आने वाले समय में कुछ नगर निकायों का प्रशासनिक स्वरूप बदल सकता है और उनकी जिम्मेदारियां एवं भौगोलिक सीमा भी बढ़ सकती है।

बिहार में कई ग्रामीण इलाके पिछले कुछ वर्षों में तेजी से शहरी स्वरूप में तब्दील हुए हैं। इन क्षेत्रों में आबादी बढ़ने के साथ बाजार, कारोबार, आवासीय विस्तार और दूसरी शहरी गतिविधियां भी बढ़ रही हैं।सरकार ऐसे इलाकों की पहचान करेगी। इसके बाद उन्हें नजदीकी नगर निकाय में शामिल करने या जरूरत पड़ने पर अलग नगर निकाय बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है।इसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में बिहार में नए नगर निकायों के गठन का रास्ता खुल सकता है।जिला स्तर पर चर्चा और समीक्षा के बाद जिलाधिकारी निर्धारित प्रपत्र में प्रस्ताव नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजेंगे। सरकार ने इसके लिए 15 सितंबर 2026 तक की समय-सीमा तय की है।जिलों से प्रस्ताव मिलने के बाद विभाग उनकी समीक्षा करेगा। इसके आधार पर आगे नगर निकायों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

सरकार की इस पूरी कवायद के पीछे तेजी से बढ़ता शहरीकरण अहम वजह माना जा रहा है। आबादी और शहरी गतिविधियों के विस्तार के साथ प्रशासनिक सीमाओं को भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालना जरूरी हो रहा है।कई ऐसे इलाके हैं जो कागज पर अभी ग्रामीण क्षेत्र हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर वहां शहरी आबादी और गतिविधियां तेजी से बढ़ चुकी हैं। ऐसे इलाकों को बेहतर सड़क, जलापूर्ति, ड्रेनेज, कचरा प्रबंधन, स्ट्रीट लाइट और दूसरी शहरी सुविधाओं से जोड़ने के लिए नगर निकाय का दर्जा महत्वपूर्ण हो सकता है।

फिलहाल सरकार ने किसी जिले या नगर निकाय का नाम तय नहीं किया है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि किस शहर की सीमा कितनी बढ़ेगी या कौन-सा नया नगर निकाय बनेगा।पहले जिलों से प्रस्ताव लिए जाएंगे, फिर जिला स्तर पर उनकी समीक्षा और अनुशंसा होगी। इसके बाद विभागीय स्तर पर परीक्षण के पश्चात अंतिम निर्णय की दिशा में कदम बढ़ेंगे।यानी 15 सितंबर के बाद बिहार के शहरी नक्शे को लेकर तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है। अगर प्रस्ताव मंजूर हुए तो कई ग्रामीण इलाके शहर का हिस्सा बन सकते हैं, छोटे निकायों का दर्जा बदल सकता है और राज्य में नए नगर निकाय भी अस्तित्व में आ सकते हैं।