Bihar Teacher News: बिहार में ट्रेनिंग के बाद भी 'फेल' शिक्षक! अब गुरुजी एक दूसरे से सीखेंगे छात्रों को पढ़ाने का हुनर, जानिए पूरी खबर
Bihar Teacher News: बिहार के सरकारी स्कूलों में कक्षा 3 से 6 तक के कई बच्चे अब भी बुनियादी गणित और भाषा कौशल में कमजोर हैं। ऐसे में अब सवाल खड़ा हो रहा है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उच्च डिग्री और लगातार ट्रेनिंग के बावजूद छात्रों के सीखने के स्तर में अपेक्षित सुधार क्यों नीं हो रहा है। बीएड, डीएलएड, टीईटी-सीटीईटी जैसी परीक्षाओं और नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण के बावजूद हालात चिंताजनक बने हुए हैं। ऐसे में अब शिक्षा विभाग ने बड़ा अहम फैसला लिया है।
शिक्षा विभाग के रिपोर्ट में हुआ खुलासा
दरअसल, शिक्षा विभाग और ASER की ताजा रिपोर्ट ने इस स्थिति को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा 3 से 6 तक के कई छात्र अब भी बुनियादी गणित (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) और भाषा कौशल में कमजोर हैं। इस समस्या से निपटने के लिए शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है। अब हर शनिवार शिक्षक संकुल (क्लस्टर) स्तर पर बैठक करेंगे, जहां वे एक-दूसरे के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे और पढ़ाने के नए तरीके सीखेंगे। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के अनुसार, यह औपचारिक ट्रेनिंग नहीं होगी, बल्कि शिक्षकों के बीच ज्ञान और अनुभवों का आदान-प्रदान करने का मंच होगा।
तीन शिफ्ट में होगी बैठक
हर शनिवार होने वाली यह बैठक 2 घंटे 15 मिनट की होगी, जिसे तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहली शिफ्ट (15 मिनट)- कक्षा 1 से 3 तक के शिक्षक एजेंडे और निर्देशों पर चर्चा करेंगे। दूसरी शिफ्ट (60 मिनट)- पाठ्यपुस्तकों के आधार पर शिक्षण और छात्रों के स्तर सुधारने पर फोकस रहेगा। भाषा और गणित की प्रगति के लिए रजिस्टर बनाने पर भी चर्चा होगी। तीसरी शिफ्ट (60 मिनट)- शिक्षक अपनी पाठ योजना तैयार करेंगे और पढ़ाई को रोचक बनाने के तरीकों पर मंथन करेंगे।
रोस्टर के अनुसार होगी भागीदारी
राज्य के करीब एक लाख शिक्षक इस पहल में शामिल होंगे। इसके लिए विषयवार रोस्टर भी तय किया गया है। जिसके तहत पहला शनिवार को कक्षा 1 से 3 के शिक्षक, दूसरा शनिवार को कक्षा 4 और 5 के शिक्षक, तीसरा शनिवार को भाषा और सामाजिक विज्ञान के शिक्षक और चौथा शनिवार को गणित और विज्ञान के शिक्षक शामिल होंगे।
बच्चों के ‘माइंडसेट’ को समझना
इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों के सीखने के स्तर और उनकी समझ को बेहतर बनाना है। शिक्षक अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि व्यावहारिक और रोचक तरीकों से पढ़ाने पर जोर देंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस ‘मंथन’ से शिक्षकों के बीच सहयोग बढ़ेगा और इसका सीधा फायदा छात्रों की सीखने की क्षमता में सुधार के रूप में देखने को मिलेगा।