सीएम सम्राट की अनोखी पहल, बिहार की सड़कों को मिलेगी सात साल की सुरक्षा, अब होगी इस खास किस्म से निगरानी
पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज पाल ने बताया कि सरकार की इस पहल से बिहार में सड़कों के निर्माण के साथ-साथ उनके नियमित रखरखाव को भी प्राथमिकता मिलेगी। बेहतर सड़कें, सुगम यातायात और सुरक्षित आवागमन देगी
Bihar News : बिहार में सड़क निर्माण और रखरखाव को लेकर राज्य सरकार ने दीर्घकालिक और आधुनिक व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 26 सितंबर 2026 को 10,590.5328 करोड़ रुपये की लागत से राज्य उच्च पथों एवं वृहद जिला पथों के 66 पैकेजों में दीर्घकालीन निष्पादन और उपलब्धि आधारित पथ अनुरक्षण संविदा प्रणाली (OPRMC-3) के तीसरे चरण का शुभारंभ किया। इसके तहत वर्ष 2026 से 2033 तक सात वर्षों के लिए 13,033 किलोमीटर से अधिक सड़कों के संधारण का कार्य किया जाएगा।
इस संबंध में पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज पाल ने बताया कि सरकार की इस पहल से बिहार में सड़कों के निर्माण के साथ-साथ उनके नियमित रखरखाव को भी प्राथमिकता मिलेगी। बेहतर सड़कें, सुगम यातायात और सुरक्षित आवागमन के जरिए आम लोगों को सीधा लाभ पहुंचाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पांच घंटे से चार घंटे में पटना पहुंचने का लक्ष्य
पंकज पाल ने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि बिहार के किसी भी सदर क्षेत्र से पटना राजधानी तक पहुंचने में चार घंटे से अधिक समय नहीं लगे। इसके लिए सड़कों के निर्माण के साथ उनकी गुणवत्ता और रखरखाव पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि बेहतर सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों, व्यापार, रोजगार और विकास की गति को बढ़ाने का आधार भी हैं। सड़कों की स्थिति बेहतर होने से आम नागरिकों, व्यापारियों और किसानों को भी सुविधा मिलेगी।

उन्होंने बताया कि पथ निर्माण विभाग ने सड़कों के रखरखाव की पुरानी व्यवस्था में आने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए वर्ष 2013 में बिहार पथ अनुरक्षण नीति लागू की थी। इस नीति के पहले चरण (2013-18) में 2,579.17 करोड़ रुपये की लागत से 9,064 किलोमीटर सड़कों का संधारण किया गया। दूसरे चरण (2019-26) में 6,654.77 करोड़ रुपये की लागत से 13,064 किलोमीटर सड़कों का रखरखाव 72 पैकेजों में पूरा किया गया। अब तीसरे चरण में 100 अदद पैकेजों के माध्यम से सात वर्षों तक सड़कों के रखरखाव की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए 15,967.0342 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
आधुनिक तकनीक से होगी सड़कों की निगरानी
OPRMC-3 के तहत सड़कों की निगरानी और रखरखाव में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग (AI/ML) आधारित तकनीकों को शामिल किया गया है। सड़क निर्माण एवं रखरखाव की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए मॉडल बिडिंग डॉक्यूमेंट में भी आवश्यक संशोधन किए गए हैं। इससे सड़कों की स्थिति पर बेहतर निगरानी रखने और समय पर मरम्मत सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
हर किलोमीटर सड़क की होगी निगरानी
पंकज पाल के अनुसार राज्य सरकार की इस योजना में केवल सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि उनकी नियमित देखरेख को भी अहम स्थान दिया गया है। जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर तक सड़कों को बेहतर स्थिति में बनाए रखने की व्यवस्था की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि सड़कें सुरक्षित और व्यवस्थित रहें तथा खराब होने की स्थिति में समय पर उनका संधारण किया जा सके। इससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका कम करने और यातायात को सुगम बनाने में भी मदद मिलेगी।
विकास की रफ्तार को मिलेगी मजबूती
बिहार में सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने की यह पहल राज्य के विकास और आम नागरिकों की सुविधा से सीधे जुड़ी है। सात वर्षों तक रखरखाव की व्यवस्था से सड़कों की गुणवत्ता बनाए रखने और बार-बार मरम्मत की जरूरत को कम करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य सरकार का यह कदम बिहार में बेहतर सड़क संपर्क, सुगम यातायात और विकास की गति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।