Bihar Panchayat News: पंचायत प्रतिनिधियों के निधन पर परिजनों को मिलेंगे 5 लाख, जानें नियम

बिहार सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों के परिजनों के लिए 5 लाख रुपये के अनुग्रह अनुदान का प्रावधान किया है। 27 जून 2025 से लागू इस व्यवस्था के तहत सामान्य या दुर्घटना में मृत्यु होने पर आश्रितों को आर्थिक सहायता दी जाएगी।

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बिहार पंचायत प्रतिनिधि 5 लाख अनुदान- फोटो : news 4 nation AI

बिहार सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों के परिवारों के लिए एक बड़ा कल्याणकारी कदम उठाया है. कार्यकाल के दौरान किसी जनप्रतिनिधि की मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को 5 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान (अनुग्रह राशि) दिया जाएगा. यह महत्वपूर्ण व्यवस्था 27 जून 2025 से प्रदेश भर में लागू है, जिसका मुख्य उद्देश्य जनसेवा में लगे प्रतिनिधियों के निधन के बाद उनके आश्रितों को तुरंत आर्थिक संबल प्रदान करना है.


निर्वाचन से लेकर कार्यकाल तक मिलेगा सुरक्षा कवच

सरकार के इस प्रावधान के तहत पंचायत स्तर के सभी पात्र निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं. चुनाव जीतने की आधिकारिक घोषणा की तारीख से लेकर पद पर बने रहने की पूरी अवधि तक यह आर्थिक सुरक्षा कवच प्रभावी रहेगा. इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि 5 लाख रुपये की यह सहायता राशि केवल किसी दुर्घटना या अनहोनी तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यकाल के दौरान सामान्य मृत्यु होने की स्थिति में भी आश्रित परिवार को दी जाएगी.


पारदर्शी प्रक्रिया और सीधे बैंक खाते में भुगतान

अनुग्रह अनुदान की राशि प्राप्त करने के लिए आश्रित परिवार को एक निर्धारित प्रशासनिक और सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा. मामले की पात्रता जांच और आवश्यक कागजी सत्यापन के बाद सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति प्रदान की जाएगी. पारदर्शिता सुनिश्चित करने और बिचौलियों को दूर रखने के लिए सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते (DBT) में ट्रांसफर की जाएगी, जिससे पीड़ित परिवार को अनावश्यक दफ्तरी चक्करों से राहत मिलेगी.


ग्रामीण जनप्रतिनिधियों के लिए क्यों खास है यह फैसला

मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, वार्ड सदस्य और पंच जैसे जनप्रतिनिधि गांव की सरकार चलाने और स्थानीय समस्याओं के समाधान में दिन-रात लगे रहते हैं. ऐसे में किसी प्रतिनिधि के अचानक निधन से परिवार के सामने जीवन-यापन का संकट पैदा हो जाता है. पंचायत चुनाव की बढ़ती सरगर्मियों के बीच सरकार के इस फैसले से चुनाव लड़ने वाले और वर्तमान जनप्रतिनिधियों व उनके परिजनों में सुरक्षा और विश्वास की भावना मजबूत हुई है.