बिहार के नियोजित शिक्षकों पर गिरेगी गाज? निगरानी विभाग की रिपोर्ट में 6 लाख से अधिक प्रमाणपत्रों की जांच के बाद हुआ बड़ा खुलासा
बिहार में वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच में अब तक 6,67,144 दस्तावेजों का सत्यापन पूरा हो चुका है । निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की इस कार्रवाई में अब तक कुल 1,748 FIR दर्ज की गई हैं, जिसमें 2,953 अभियुक्त नामजद हैं
Patna - बिहार सरकार के निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त हुए नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट जारी की गई है । माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित आदेश (सी०डब्ल्यू० जे०सी० सं०- 15459/14) और निगरानी जांच संख्या बी०एस०- 08/15 के आलोक में यह कार्रवाई की जा रही है । इस जांच अभियान के तहत 28 फरवरी 2026 तक निगरानी ब्यूरो द्वारा कुल 6,67,144 प्रमाणपत्रों का सफलतापूर्वक सत्यापन किया जा चुका है ।
जांच के क्रम में बड़ी संख्या में शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं, जिसके आधार पर अब तक विभिन्न जिलों में कुल 1,748 FIR दर्ज कराई जा चुकी हैं । इन दर्ज मामलों में कुल अभियुक्तों की संख्या 2,953 तक पहुँच गई है । ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, अकेले वर्ष 2026 के शुरुआती दो महीनों (जनवरी से 28 फरवरी तक) में ही सत्यापन के दौरान अंक-पत्र और प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर 31 नई प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं, जिनमें 31 शिक्षकों को नामजद किया गया है ।
वर्षवार आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2015 में 67 मामलों से शुरू हुई यह कार्रवाई 2022 में अपने चरम पर थी, जब एक ही वर्ष में 445 FIR दर्ज की गई थीं । इसके बाद वर्ष 2023 में 337, वर्ष 2024 में 111 और वर्ष 2025 में 136 मामले दर्ज किए गए । निगरानी विभाग की इस निरंतर कार्रवाई से स्पष्ट है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों के विरुद्ध सरकार का कड़ा रुख जारी है।
रिपोर्ट - अनिल कुमार